पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद-धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले डेढ़ दशक के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर वन विनाश का मामला सामने आया है। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अतिक्रमण के कारण 10 लाख से अधिक वृक्ष और पौधे नष्ट हुए, जिससे बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को गंभीर क्षति पहुंची।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2005 से 2021 के बीच विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 956 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण किया गया। अतिक्रमणकारियों ने जंगल साफ कर खेती और बसाहट विकसित की, जिसके चलते सघन साल, सागौन और बांस के वन उजड़ गए। उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और जीपीएस आधारित साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने अतिक्रमण की पुष्टि की और चरणबद्ध कार्रवाई करते हुए कब्जा हटाया।

उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि बड़े वृक्षों को सीधे काटने के बजाय ‘गर्डलिंग’ तकनीक अपनाई गई, जिसमें पेड़ों की छाल हटाकर उन्हें धीरे-धीरे सुखाया गया। बाद में सूख चुके वृक्षों को काट दिया गया और कई स्थानों पर ठूंठों को भी जला दिया गया, ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें।

अधिकारियों का कहना है कि उपग्रह और ड्रोन तकनीक ने वर्षों पुराने वन विनाश के प्रमाण जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हीं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायालयों में वन विभाग का पक्ष मजबूत हुआ और अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर याचिकाएं भी खारिज हुईं।
वन विभाग ने बताया कि मुक्त कराई गई 956 हेक्टेयर भूमि बाघों के महत्वपूर्ण आवास, हाथियों के आवागमन मार्ग और महानदी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। अतिक्रमण हटने के बाद यहां प्राकृतिक रूप से वन पुनर्जीवित हो रहे हैं तथा वन्यजीवों की आवाजाही में भी सुधार देखा जा रहा है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसे विज्ञान, कानून और वन संरक्षण के संयुक्त प्रयासों की बड़ी सफलता बताते हुए कहा है कि भविष्य में भी वन अपराधों और सागौन तस्करी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
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