उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने बिजली लाइनों पर काम करने के लिए फोन पर मिलने वाली अनुमति को बंद कर दिया है। अब कर्मचारियों को सब-स्टेशन से लिखित मंजूरी लेना और अनिवार्य सुरक्षा किट पहनना आवश्यक होगा।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (Uttar Haryana Bijli Vitran Nigam) ने बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। निगम ने बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत उपकरणों पर काम के लिए टेलीफोनिक अनुमति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी है। अब कोई भी कर्मचारी केवल फोन पर मिली मंजूरी के आधार पर कार्य शुरू नहीं कर सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को उपकेंद्र से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। विभाग का मानना है कि पहले मौखिक और दूरभाष पर अनुमति मिलने के कारण कई बार सुरक्षा में चूक हो जाती थी, जिससे हादसों का खतरा बना रहता था। अब लाइन बंद करने के साथ तीनों चरणों की अर्थिंग, परीक्षण उपकरण से जांच और सभी सुरक्षा साधनों का उपयोग जरूरी कर दिया गया है।

विभाग ने साफ किया है कि सुरक्षा पेटी, हेलमेट और दस्तानों के बिना काम करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। वहीं कार्य पूरा होने के बाद संबंधित कर्मचारी की पुष्टि के बाद ही बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी भी तय होगी।

इलेक्ट्रिसिटी इंप्लॉयज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष Subhash Lamba ने कहा कि असुरक्षित कार्यप्रणाली के कारण कई कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने सुरक्षा उपकरणों की कमी को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी

उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) ने बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अहम फैसला लिया है। अब बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मर या किसी भी विद्युत उपकरण पर केवल फोन पर मिली अनुमति के आधार पर काम नहीं किया जा सकेगा।

विभाग ने टेलीफोनिक अनुमति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी है। अब बिना उपकेंद्र से लिखित अनुमति लिए कोई भी कर्मचारी कार्य शुरू नहीं करेगा। पहले कई बार केवल मौखिक या दूरभाष पर अनुमति से काम शुरू हो जाता था जिससे सुरक्षा में चूक और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था

अब नई व्यवस्था में लाइन बंद करना, तीनों चरणों की अर्थिंग करना, परीक्षण उपकरण से लाइन की जांच करना और सभी सुरक्षा साधनों का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सुरक्षा पेटी, हेलमेट और दस्तानों के बिना कार्य करना कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

कार्य समाप्त होने के बाद संबंधित कर्मचारी की पुष्टि के बाद ही बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी। दुर्घटना की स्थिति में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होगी। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लॉयज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा का कहना है कि कई कर्मचारियों को असुरक्षित कार्यप्रणाली के चलते जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपकरणों की कमी कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है।