देहरादून. धामी सरकार पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा, अजब सी दास्तां है. सरकार का मुख कुछ घोषणा करता है और सरकार के हाथ, मुख से हुई घोषणा का अनुपालन करने के बजाय कुछ ऐसी शर्तें छोड़ देते हैं कि घोषणा लगभग निरर्थक हो जाती है. उत्तराखंड के ठेकेदार, वह लोग जो यहीं रह रहे हैं, यहीं छोटे-छोटे काम कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ा रहे हैं, हमारे गांव-घर के मध्यम वर्ग, जो हमारी अर्थव्यवस्था के स्थानीय ध्वजवाहक हैं. धन्य है भाजपा, तुमने ई-टेंडर के नाम के साथ कुछ ऐसी शर्तें रख दी कि ये स्थानीय ठेकेदार जो करोड़ों रुपये की काम करने की क्षमता रखते हैं, आज खाली हाथ हैं.

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आगे हरीश रावत ने कहा, जब आंदोलन की धमकी दी. हमने भी उनकी आवाज उठाई तो सरकार ने कहा कि 10 करोड़ रुपये तक के काम स्थानीय ठेकेदारों को दिए जाएंगे और डेढ़ करोड़ रुपये तक के कामों को सिंगल बिड में लगाया जाएगा. ठेकेदारों ने विश्वास किया और अब सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, आरईएस, सरकार की घोषणाओं का सम्मान करने के बजाय 5 साल की शर्त तो है ही, मगर साथ-साथ एक नई शर्त भी जोड़ दी है कि पिछले 1 साल में जितने का कार्य रखा है, उसके 50% के काम करने का उनके पिछले 1 साल के अंदर का अनुभव होना चाहिए.

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आगे उन्होंने कहा, लगभग 90% उत्तराखंड के ठेकेदार इस शर्त के कारण अब सरकार के मुख से हुई घोषणा के लाभ से वंचित हो गए हैं. अब तो ऐसा लगता है कि उत्तराखंड के मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग, जिसको इन्होंने समाप्त कर दिया है, उनको अब उठकर खड़ा होना चाहिए. हमारा वादा है कि हम सारी इन व्यवस्थाओं को अपने उत्तराखंड की आर्थिक व्यवस्था के आधार स्तंभों के हित में बदलेंगे और जो आज बर्बादी के मोड़ पर खड़े हैं, उनको फिर से अपनी अर्थव्यवस्था की प्रमुख धारा में सम्मिलित करेंगे. जय हिंद, जय ठेकेदार.