अजय सैनी, भिवानी: आज के इस आधुनिक दौर में जहां लोग अपने निजी जीवन और भागदौड़ भरी व्यस्तताओं से बाहर नहीं निकल पाते, वहीं भिवानी जिले के गांव खरक खुर्द के रहने वाले सुंदर सिंह उर्फ ‘काला भांजा’ ने समाज सेवा और जन-कल्याण की एक ऐसी अनोखी मिसाल पेश की है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा है। भाजपा के मंडल महामंत्री सुंदर सिंह पिछले कई दशकों से बिना किसी स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के ग्रामीणों की सेवा में जुटे हुए हैं और आज वे पूरे इलाके के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक बन चुके हैं।

आस्था को बनाया जनसेवा का माध्यम, 28 साल से नि:शुल्क इलाज

सुंदर सिंह बाबा गुरु गोरखनाथ के परम भक्त हैं। उनका अटूट विश्वास है कि गुरु के आशीर्वाद से ही उन्हें समाज की सेवा करने की आत्मिक शक्ति मिलती है। इसी आस्था को जनसेवा का जरिया बनाते हुए वे पिछले 28 सालों से लगातार पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के लिए पारंपरिक रूप से ‘झाड़ा’ लगाने और उपचार करने का कार्य कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है। इस कार्य के लिए वे किसी भी मरीज से एक रुपया भी नहीं लेते और इसे पूरी तरह मानवता की सेवा को समर्पित मानते हैं। उनके पास दूर-दूर से लोग इलाज के लिए आते हैं।

मुक्तिधाम का बदला स्वरूप, लगा दिए 550 पौधे

गांव के श्मशान घाट (मुक्तिधाम) की तस्वीर बदलने में सुंदर सिंह का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। पिछले 9 वर्षों से वे पूरे गांव के सहयोग से मुक्तिधाम परिसर में कायाकल्प और जीर्णोद्धार का सेवा कार्य संभाल रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से चंदा एकत्रित कर मुक्तिधाम परिसर में करीब 550 छायादार और फलदार पेड़ लगाए हैं, जिससे आज वह कभी वीरान रहने वाली जगह एक सुंदर और हरे-भरे पार्क का रूप ले चुकी है। यही नहीं, उनके प्रयासों से परिसर में दो भव्य मूर्तियों की स्थापना भी कराई गई है, जिसमें पूरे गांव का भरपूर सहयोग मिला है।

मौसम चाहे जो हो, सुबह 5 से 7 बजे तक सिर्फ गौ-सेवा

पर्यावरण और मानव सेवा के साथ-साथ सुंदर सिंह पिछले 5 वर्षों से लगातार गौ-सेवा के कार्य में भी पूरी निष्ठा से लीन हैं। उनका यह नियम इतना पक्का है कि मौसम चाहे कोई भी हो, कड़ाके की सर्दी, भीषण गर्मी या फिर मूसलाधार बरसात—उनके कदम कभी नहीं रुकते। वे रोजाना सुबह 5 से 7 बजे तक का अपना कीमती समय सिर्फ और सिर्फ बेसहारा और बीमार गौ-माता की सेवा के लिए निकालते हैं। उनकी इस नि:स्वार्थ भावना को देखकर आज पूरा गांव उन पर गर्व करता है।