अमित पाण्डेय, खैरागढ़। खैरागढ़ की सरकारी शराब दुकान फिर विवादों के केंद्र में है। कभी मिलावटी शराब और फर्जी होलोग्राम को लेकर सुर्खियों में रही यह दुकान अब कथित ओवररेटिंग, अव्यवस्था और दबंगई जैसे आरोपों से घिर गई है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि शराब खरीदने पहुंचे ग्राहकों के बीच अब एक चर्चा आम हो चुकी है कि अगर जल्दी चाहिए तो रेट से ज्यादा देना पड़ेगा।
लोगों का आरोप है कि दुकान के बाहर कुछ कथित असामाजिक तत्वों ने अपना अनौपचारिक नेटवर्क बना रखा है। आरोपों के मुताबिक निर्धारित कीमत से 10 रुपए ज्यादा लेकर शराब उपलब्ध कराई जा रही है। जो ग्राहक इसका विरोध करते हैं, उन्हें गाली-गलौज, धमकी और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल कथित तौर पर सरकारी दुकान के आसपास ही चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की सख्ती कहीं नजर नहीं आती।
शाम ढलते ही दुकान के बाहर हालात और बिगड़ने लगते हैं। लंबी कतारें, धक्का-मुक्की, हंगामा और अफरा-तफरी अब यहां आम तस्वीर बन चुकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था लगभग नदारद है। न पर्याप्त गार्ड दिखाई देते हैं, और न ही भीड़ नियंत्रण का कोई पुख्ता इंतजाम। यही वजह है कि आए दिन विवाद, मारपीट,जेब कटना और चाकूबाजी जैसी घटनाओं की चर्चाएं इलाके में सुनाई देती रहती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पहले से विवादों में रही इस दुकान पर आबकारी विभाग ने निगरानी क्यों नहीं बढ़ाई? जब पहले भी मिलावटी शराब और नियमों के उल्लंघन जैसे मामले सामने आ चुके हैं, तो फिर सुरक्षा और व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या विभाग सिर्फ शिकायतों के बाद बयान जारी करने तक सीमित रह गया है?
मामले पर जब खैरागढ़ आबकारी विभाग के अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब खैरागढ़ में सवाल सिर्फ जांच का नहीं, भरोसे का है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी शराब दुकान में व्यवस्था कब दिखाई देगी? क्योंकि फिलहाल यहां शराब से ज्यादा अव्यवस्था बिकती नजर आ रही है।
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