सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने बिजली क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दोनों राज्यों ने 2,000 मेगावाट पीक पावर की संयुक्त खरीद और मध्यम अवधि की फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनाई है. इस संबंध में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) और मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए.

शनिवार को शक्ति भवन में हुई बैठक में मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जी.एस. खनूजा और यूपीपीसीएल के मुख्य अभियंता मनीष द्विवेदी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. यह पहल अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं यूपीपीसीएल अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल, यूपीपीसीएल प्रबंध निदेशक नितीश कुमार, मध्य प्रदेश सरकार के सचिव विशेष गरपाले और यूपीपीसीएल निदेशक (कॉरपोरेट प्लानिंग) दीपक रायजादा के नेतृत्व में आगे बढ़ाई गई.

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समझौते का आधार दोनों राज्यों की अलग-अलग मौसमी विद्युत मांग है. मध्य प्रदेश में अक्टूबर से मार्च तक रबी सीजन में कृषि क्षेत्र के कारण बिजली की मांग अधिक रहती है, जबकि उत्तर प्रदेश में अप्रैल से सितंबर तक गर्मी और खरीफ सीजन में मांग का दबाव ज्यादा होता है. दोनों राज्यों की इस पूरक मांग का लाभ उठाकर उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, जिससे खरीद लागत भी कम होने की उम्मीद है. एमओयू के तहत दोनों राज्य प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से 2,000 मेगावाट पीक पावर की खरीद शुरू करेंगे. इससे मौसमी जरूरतों के अनुरूप संसाधन प्रबंधन बेहतर होगा और विद्युत परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग संभव होगा.

10,000 करोड़ रुपये तक के निवेश की उम्मीद

इस व्यवस्था से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बनेंगी. इससे बुनियादी ढांचे का विस्तार, रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा विकास को गति मिलने की उम्मीद है. दोनों राज्यों ने मध्यम अवधि की फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति जताई है. इसके जरिए एक राज्य में उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का दूसरे राज्य की जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे महंगी अल्पकालिक बिजली खरीद पर निर्भरता घटेगी, ग्रिड में लचीलापन बढ़ेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी. अधिकारियों का कहना है कि यह पहल उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.