लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के 16 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई यह व्यवस्था आज भी लगातार जारी है। खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के योजना का लाभ पहुंचे।

47 लाख नए लाभार्थियों को जोड़ा जाएगा

बुधवार को लोकभवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि वह स्वयं 16 जिलों का दौरा कर राशन वितरण व्यवस्था का जायजा ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 47 लाख नए पात्र लाभार्थियों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।

योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

मनोज पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत संचालित यह व्यवस्था देश की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। योजना के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

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उन्होंने बताया कि लाभार्थियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर शुरू किया जाएगा। राशन की आपूर्ति करने वाले वाहनों की विभागीय स्तर पर मार्किंग की जाती है, जिससे खाद्यान्न की आवाजाही और वितरण प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके।

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे वृद्ध और दिव्यांगजन हैं, जो स्वयं उचित दर की दुकानों तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे लाभार्थियों के लिए राशन की होम डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा खाद्यान्न के आवंटन और वितरण से संबंधित जानकारी लाभार्थियों को एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

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खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक 7,534 अन्नपूर्णा भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 2,576 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। सरकार का उद्देश्य राशन वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।

मनोज पांडेय ने बताया कि विवाह के बाद बेटियों के राशन कार्ड की यूनिट को उनके नए जिले अथवा राज्य में स्थानांतरित करने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। इस पहल का लाभ अब तक 55,910 महिलाओं को मिल चुका है, जिससे उन्हें नए निवास स्थान पर राशन प्राप्त करने में सुविधा हो रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष गेहूं खरीद का ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। वर्ष 2017-18 से 2026-27 के बीच 55.89 लाख किसानों से 265.82 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है। यह उपलब्धि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का परिणाम है।