सतीश सिंह, लखनऊ. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित गबन के मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तेजी पकड़ ली है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (SIT preliminary investigation report) सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में दाखिल कर दी है. रिपोर्ट की सामग्री को जांच प्रभावित न हो, इसलिए सार्वजनिक नहीं किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने गत 13 जुलाई को एसआईटी से एक सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी. अदालत ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब मांगा था. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके.
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उधर, पुलिस और एसआईटी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. मुख्य आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर चोरी की रकम से खरीदी गई एक कार और मोटरसाइकिल भी जब्त की है. आरोपियों से पूछताछ में चढ़ावे के धन के दुरुपयोग से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है.
एसआईटी की जांच केवल चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न आयोजनों और खर्चों से जुड़े वित्तीय पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है. जांच टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट में न केवल जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों की सिफारिशें भी कर सकती है.
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इसी बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रशासनिक सुधारों की प्रक्रिया भी तेज हो गई है. ट्रस्ट की आगामी बैठक में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति और एसआईटी की रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है. इस पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं.
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. ऐसे में चढ़ावे से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच को लेकर लोगों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं. अदालत की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.


