मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. संसद भवन परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर किए गए प्रदर्शन के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है. अयोध्या की अदालत ने इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और फैजाबाद-अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के विरुद्ध दाखिल प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी.
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प्रार्थना पत्र हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व अधिवक्ता मनीष कुमार पांडेय की ओर से दाखिल किया गया था. मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार शर्मा और शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वितीय, अयोध्या की पीठासीन अधिकारी स्वर्णमाला सिंह ने 1 अक्टूबर 2026 को आदेश पारित करते हुए प्रार्थना पत्र को परिवाद के तौर पर दर्ज किया है. प्रार्थना पत्र भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दाखिल किया गया था.
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि 31 जुलाई 2026 को संसद भवन परिसर में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर एक नाटकीय प्रस्तुति की गई थी, जिससे सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. इसी को आधार बनाते हुए प्रार्थी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की मांग की है.
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अदालत के आदेश में उल्लेख है कि प्रार्थी मनीष पांडेय ने इस मामले को लेकर 4 अगस्त 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अयोध्या को प्रार्थना पत्र देकर FIR दर्ज करने की मांग की थी. प्रार्थी का आरोप है कि पुलिस स्तर पर न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही कोई जांच शुरू हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली. न्यायालय ने अब प्रार्थी से मामले में साक्षियों की सूची मांगी है और परिवाद के रूप में केस को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

