मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती को लेकर व्यवस्था पहले से और ज्यादा सख्त कर दी गई है. मंदिर ट्रस्ट ने पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए नया ड्रेस कोड और थ्री-लेवल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू किया है.

बिना जेब वाला केसरिया जंपसूट अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाला केसरिया रंग का जंपसूट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. यह जंपसूट ऊपर से नीचे तक एक ही रंग का होगा और इसमें किसी तरह की जेब नहीं होगी. तय पोशाक के बिना किसी भी कर्मचारी को काउंटिंग कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा. इसका सीधा उद्देश्य है – यूनिफॉर्म में जेब ही नहीं होगी तो चोरी कैसे होगी.

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तीन स्तर की जांच, मोबाइल-पर्स-बेल्ट सब बैन

काउंटिंग कक्ष में प्रवेश से पहले तीन स्तर की जांच अनिवार्य की गई है. कक्ष के भीतर मोबाइल फोन, पर्स, चमड़े के बेल्ट, चाबियां या अन्य कोई भी निजी सामान ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. साथ ही कैमरा, बैग ले जाने पर भी रोक है और गिनती की प्रक्रिया पर हाईटेक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक अब चढ़ावे की गिनती जमीन पर बैठकर की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया कैमरे की नजर में रहे.

कौन कर रहा है गिनती

राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ जितेंद्र मिश्र खुद व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं. काउंटिंग से जुड़े सभी कर्मचारियों का बायोडाटा और पुलिस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है. फिलहाल चढ़ावे की गिनती दो शिफ्टों में हो रही है. इसमें कुल 36 कर्मचारी लगाए गए हैं – जिसमें बैंक के 10 कर्मचारी, मंदिर ट्रस्ट के 4 प्रतिनिधि और 22 आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं.

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ट्रस्ट के इस कदम को हाल में सामने आए चंदा चोरी के मामले के बाद उठाया गया सख्त कदम माना जा रहा है. ट्रस्ट का कहना है कि दान की गिनती से लेकर उसकी पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है.

पुजारियों के लिए भी नया ड्रेस कोड

सिर्फ काउंटिंग स्टाफ ही नहीं, गर्भगृह के पुजारियों के लिए भी ड्रेस कोड लागू किया गया है. धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास के अनुसार पुजारी पीले रंग का रेशमी या सूती अचला और उत्तरीय धारण करेंगे. गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. साथ ही पुजारियों को गर्भगृह से बाहर निकलने से पहले प्रभारी आचार्य को सूचित करना अनिवार्य होगा. श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए दर्शन के बाद प्रसाद देते समय तिलक लगाकर सम्मानित करने की व्यवस्था भी शुरू की जा रही है.