संजय तिवारी, बलिया. न्याय भी बिकता है! बस कोई उसका सही दाम लगाने वाला होना चाहिए. सुनने में थोड़ा अजीब है, लेकिन यूपी सरकार के पुलिसिया सिस्टम की यही हकीकत है. जिसका खामियाजा एक नाबालिग लड़की को जान देकर चुकाना पड़ा है. परिजनों ने पुलिस की मिलीभगत और नाबालिग को धमकाने का आरोप लगाया है, जिसकी वजह से लड़की ने फांसी लगाकर जान दी है. ये आरोप योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पर किसी तमाचे से कम नहीं है. साथ ही सरकार के दावों पर भी बड़ा प्रश्न चिन्ह है. सवाल ये है कि क्या अब रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं? क्या इन पर लगाम कसने वाला कोई नहीं है?

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बता दें कि पूरा मामला मनियर थाना क्षेत्र के एक गांव का है. जहां रहने वाली लड़की ने फांसी लगाकर जान दे दी. परिजनों का आरोप है कि पीड़िता के घर के बगल के ही एक लड़के ने उसका कुछ अंतरंग वीडियो बना लिया था. जिसके बाद वह उस पर लगातार अनैतिक मांग मानने का दबाव बना रहा था. इस मामले में लड़के के कुछ दोस्त भी शामिल थे. 31 जुलाई को लड़का अपने कुछ दोस्तों के साथ लड़की को कहीं दूसरे स्थान पर बुला रहा था, जिसका लड़की ने विरोध किया और मामले की जानकारी उसने अपने घर वालों को दी. जिसके बाद परिजनों ने मनियर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन थाना प्रभारी मनियर ने लड़की की मां की तहरीर बदलवाकर यौन शोषण व पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज न करके आईटी एक्ट और आपराधिक धमकी में मामला दर्ज कर मामले को रफा-दफा कर दिया.

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परिवार वालों का कहना है कि मुकदमा दर्ज करने के बाद मनियर पुलिस के हल्का दरोगा इस्माइल शेख आरोपियों से मिलीभगत करके लगातार धमका रहे थे. 1 अगस्त की दोपहर को इस्माइल शेख लड़की के घर गए तथा अकेले कमरे में इस्माइल शेख ने उसे धमकाया. इस्माइल शेख के जाते ही लड़की ने 10 से 15 मिनट के अंदर फांसी लगा ली. मनियर थाना प्रभारी ने पैसा लेकर तहरीर बदल दिया था. उन्होंने बड़े मामले को छोटा करके मुकदमा दर्ज कर दिया, जिससे आरोपियों को शह मिला. उन्होंने आरोपियों से पैसे लेकर हमें प्रताड़ित किया, जिससे हमारी बेटी की जान चली गई. परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों और दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो अपनी लड़की को मिट्टी नहीं देंगे.

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अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि मनियर पुलिस ने 31 जुलाई को ही पॉक्सो व छेड़खानी की धाराएं क्यों नहीं लगाई? क्या उन पर कोई दबाव था? जैसा कि मृतका के परिजन कह रहे है कि पुलिस ने पैसा लिया था? हालांकि ये सब बाते जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी. पुलिस के इस रवैये से लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं की क्या यह वही पुलिस है, जिसे जनता की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, क्योंकि अब यह पुलिस रक्षक की बजाय रक्षक बन चुकी है. जिसे पैसे ना मिलने पर लोगों की जान तक चली जाए तो भी इसे परवाह नहीं है.