अशोक कुमार जायसवाल, डीडीयू नगर. सदर ब्लॉक के पड़या गांव में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत 1.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कंपोजिट विद्यालय के बारजे का हिस्सा गिरने से हड़कंप मच गया. विद्यालय का उद्घाटन होने से पहले ही निर्माण के दौरान बारजा गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.
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घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित कार्यदायी संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से बन रहे विद्यालय के निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन होना चाहिए, ताकि भवन लंबे समय तक सुरक्षित रह सके. उन्होंने बालू, सीमेंट, गिट्टी और सरिया की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने बारजे का हिस्सा गिरने के बाद टूटे भाग को जल्दबाजी में मोडिफाई करने की कोशिश पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि मरम्मत या बदलाव करने से पहले घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिससे निर्माण में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसका पता चल सके. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य कराने वाली संस्था के साथ ही कार्य की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि विद्यालय का निर्माण बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा मामला है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.
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महंत सिंह समेत ग्रामीणों और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गौतम कुमार ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद ही निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित किया जा सकेगा.

