देहरादून. चढ़ावे में गबन के आरोपों के बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर करारा तंज कसा है. हरीश रावत ने कहा, राम जन्मभूमि ट्रस्ट और उससे जुड़ी हुई संस्थाओं के लोगों को हटाने की मांग स्वामी करपात्री जी ने कहा है कि निष्पक्ष जांच इनको हटाए बिना संभव नहीं है. अब तो भाजपा परिवार के लोग भी गड़बड़, घोटाले और दान की लूट की बड़ी आशंका व्यक्त कर रहे हैं.

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आगे हरीश रावत ने कहा, पहले केवल इंडिया गठबंधन के लोग इस मामले को उठा रहे थे. अब स्थितियां ज्यों-ज्यों आगे बढ़ी हैं, एक बड़ा घोटाला-संगठित लूट सामने आ रही है. भगवान श्री राजा रामचंद्र जी के नाम के साथ इस तरीके की स्थिति कथित राम भक्त पैदा करेंगे, यह किसी ने सोचा भी नहीं था. जन भावनाएं बहुत आहत हुई हैं. लोग योगी जी से कह रहे हैं कि, “योगी जी, इधर-उधर की बात न करो, यह बताओ कि काफिले क्यों लूटे हैं?”

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जांच के घेरे में ट्रस्ट की भूमिका

जांच के दौरान जो बातें सामने आई उसमें मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की तैनाती में बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट की भूमिका जांच के घेरे में है. बड़ा खुलासा ये है कि बैंक ने कर्मचारियों को कंपनी के जरिए आउटसोर्सिंग पर रखा था, लेकिन कर्मचारी ट्रस्ट की ओर से तय किए गए थे. यानी जिन लोगों को चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील काम में लगाया गया, वे या तो किसी पदाधिकारी के परिचित बताए जा रहे हैं या उनसे जुड़ा नेटवर्क रखते थे.

सबसे गंभीर सवाल यह है कि चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों का न तो उचित सत्यापन हुआ, न नियमित तलाशी, न प्रभावी निगरानी. ट्रस्ट के कर्मचारी आईकार्ड लगाकर परिसर में आसानी से घूमते थे. सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात होने के बावजूद ट्रस्ट कर्मियों की आवाजाही पर वैसी सख्ती नहीं दिखी.