कुलदीप सिंह, फतेहपुर. 9 अगस्त ​जनपद की थाना गाजीपुर पुलिस ने न्यायिक प्रक्रिया को ठेंगा दिखाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पेशेवर जमानतदार उपलब्ध कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में लंबे समय से वांछित चल रहे 2 मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है. यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई है.

इसे भी पढ़ें- ब्याज के साथ होगा गद्दारी का हिसाब…मंत्री मनोज पांडेय पर सपा नेता का तीखा हमला, स्वार्थी और अवसरवादी बताते हुए दिया बड़ा बयान

बता दें कि ​दिनांक 29 जून को थाना गाजीपुर के जयप्रकाश पाण्डेय ने थाने पर तहरीर दी थी. जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी महेश चन्द्र गुप्ता अपने साथियों अभिषेक, अरुण कुमार गुप्ता उर्फ राजू प्रधान, इमरान अहमद उर्फ लड्डन, मनोज और पप्पू मौर्या के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह चला रहा था. यह गिरोह विभिन्न गंभीर मुकदमों में फंसे अपराधियों को जमानत दिलाने के लिए कूटरचित और फर्जी जमानत बंधपत्र औऱ दस्तावेज तैयार करता था. इन दस्तावेजों को न्यायालय में पेश कर न्यायाधीशों को गुमराह किया जाता था और भारी आर्थिक लाभ कमाया जाता था. इस कृत्य से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी, बल्कि गंभीर अपराधी भी आसानी से बाहर आ रहे थे.

इसे भी पढ़ें- जेल में होगा जुर्म का हिसाबः एयरपोर्ट ड्यूटी की आड़ में लोगों के बैग से गहने साफ कर देता था शातिर, जानिए फिर खाकी ने कैसे दबोचा…

​इस मामले में थाना गाजीपुर में बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. ​अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी जाफरगंज के पर्यवेक्षण में थाना गाजीपुर पुलिस ने विवेचना के दौरान ठोस साक्ष्य जुटाए. 9 अगस्त को पुलिस ने दबिश देकर 2 वांछित अभियुक्तों को धर दबोचा महेश चन्द्र गुप्ता पुत्र राम सजीवन गुप्ता ​निवासी ग्राम चुरियानी, थाना गाजीपुर, (58), ​अरुण कुमार गुप्ता उर्फ राजू प्रधान पुत्र आदित्य कुमार ​निवासी भैरवा, थाना असोथर (59) ​गिरफ्तारी के बाद दोनों अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.