लखनऊ. अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के अपमान और संविधान की अवमानना भाजपा और उनके संगी-साथी समय-समय पर तरह-तरह के कुतर्क देते रहते हैं. इसी कड़ी में संविधान को बदलने या पूरी तरह से खत्म करने की साजिश करने वाले अपंजीकृत व भूमिगत रहने वाले इनके विचारवंशी कह रहे हैं कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखा ही नहीं. इनका बस चले तो यह ये भी कह सकते हैं कि संविधान है ही नहीं. दरअसल ऐसे संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने संविधान को हमेशा ही नकारा है. यही वो लोग हैं जो बाबासाहेब की मूर्तियों को तोड़ते हैं, खासतौर से बाबासाहेब की मूर्तियों के हाथों को क्योंकि उन हाथों में संविधान की किताब होती है.
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आगे उन्होंने कहा कि सच तो ये है कि एकरंगी-सुरंगजीवी नकारात्मक सोच के लोगों ने संविधान को कभी माना ही नहीं, क्योंकि ये संविधान ही गैरबराबरी को दूर करने के लिए समता-समानता की बात करता है. यही संविधान इन प्रभुत्ववादियों के उस वर्चस्व को चुनौती देता है, जिस वर्चस्व की वजह से इन्होंने पांच हजार सालों से शोषित, वंचित, गरीब ‘पीडीए समाज’ का लगातार दमन किया है. आज संविधान ‘पीडीए समाज’ की ढाल भी है और रक्षा कवच भी. संविधान से मिला हुआ ‘आरक्षण’ आज इन परंपरागत शक्तिशाली लोगों को फूटी आंख नहीं सुहाता है. ये वो पुरातनपंथी-रूढ़िवादी-दकियानूसी लोग हैं जो परिवर्तन चाहते ही नहीं है, जबकि संविधान सकारात्मक परिवर्तन का एक बेहद ताकतवर दस्तावेज है.
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आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि हमने पहले भी कहा है, आज फिर दोहरा रहे हैं शोषणकारियों के खिलाफ, बाबासाहेब हमें संविधान के रूप में कागज का एक ऐसा ताकतवर दस्तावेज देकर गये हैं, जो लोहे की तलवार से भी ज्यादा मजबूत है.
संविधान ही पीडीए के भविष्य का विधान है. संविधान ही संजीवनी है. इसमें संजीवनी की तरह को देश को अच्छा करने की और अच्छा बनाए रखने की अद्भुत शक्ति है, इसीलिए देश का नया नारा ‘जय जवान! जय किसान!! जय संविधान!!! होना चाहिए. संविधान को चुनौती देनेवाले पांचों इंद्रियों को सक्रिय करके सुन लें कि ‘देश संविधान से चलेगा, किसी संघ-विधान या मन-विधान से नहीं।’ संविधान था, संविधान है, संविधान रहेगा.



