लखनऊ. अखिलेश यादव ने लखनऊ अग्निकांड की घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि लखनऊ के अलीगंज में हुई अग्निकांड की घटना सामान्य घटना नहीं है. भाजपा सरकार में जो नक्शे पास हुए हैं और जो एनओसी मिली है, उसकी जांच होनी चाहिए. जिससे इस तरह की घटना दोबारा न हो. भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर चुका है. अगर सही जांच होगी तो भाजपा के लोग दोषी पाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि बच्चों और नई पीढ़ी की मौत किसी परिवार के लिए सबसे बड़ा दुःख होता है. लखनऊ अग्निकांड बहुत दुःखद दुर्घटना है. इतनी बड़ी संख्या में जान चली गई. मदद के लिए बच्चों ने अपने माता-पिता को फोन किया. कई लोगों ने फायर ब्रिगेड को फोन किया, लेकिन समय रहते मदद नहीं मिल पायी. इतने परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया है.
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आगे अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है. भ्रष्टाचार से बनी सरकार भ्रष्टाचार कर रही है. सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार के कारण छात्रों की जान चली गई. इससे पहले भी लखनऊ में अग्निकांड के कारण जान चली गई थी. झोपड़- पट्टियों में भी कुछ दिन पहले आगजनी हुई थी. लोगों का आरोप था कि झोपड़ पट्टियों में आग लगाई गई थी. इसी तरह से चारबाग में अग्निकांड की घटना हुई थी. लिवाना होटल में अग्निकांड की घटना कोई भूल ही नहीं सकता. अलीगंज के रेजिडेंशियल एरिया में कमर्शियल गतिविधि चल रही थी. भाजपा सरकार इतने दिनों तक क्या कर रही थी. लगता है 10 साल से प्रदेश में सरकार ही नहीं है. आखिर सरकार की क्या जिम्मेदारी है? भ्रष्टाचार करके एनओसी क्यों दी जा रही है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
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आगे अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ लोग कैमरा देख कर दिखावटी आंसू बहा रहे थे. जैसे कैमरा हटता है आंसू रूक जाते हैं. सरकार को पीड़ित परिवारों की बड़े पैमाने पर मदद करनी चाहिए. पांच लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त नहीं है, जिनकी मौत हुई है वे होनहार बच्चे थे. समाजवादी पार्टी की सरकार बनने में हम उनकी मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में डायल 100 नम्बर इसीलिए शुरू हुआ था, जिससे गांव में भी बैठकर कोई फोन करे तो पुलिस और फायर ब्रिगेड उनकी मदद के लिए आ जाए, लेकिन भाजपा सरकार ने डायल 100 को बर्बाद कर दिया. इसी 100 नम्बर से मेडिकल और अन्य सुविधायें भी मिलनी थी.
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आगे उन्होंने ये भी कहा कि सौ नम्बर से पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बूलेंस तीनों व्यवस्था जुड़नी थी. साथ ही तय किया गया था कि शहरों में पुलिस तीन से चार मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाएगी. अलीगंज में जहां अग्निकांड की घटना हुई वहां पर 100 नम्बर या 112 की गाड़ी दो से तीन मिनट की दूरी पर रही होगी, लेकिन फोन ही नहीं उठा. सरकार संवेदनशील नहीं है.

