लखनऊ. एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट से पता चला है कि योगी सरकार अपने विज्ञापन के लिए हर रोज 2.32 करोड़ रुपए खर्च किया है. जो कि मोदी सरकार से भी ज्यादा है. 8 साल में कुल खर्च की बात की जाए तो 6811.94 करोड़ रुपये सिर्फ विज्ञापन पर ही खर्च किए गए हैं. रिपोर्ट सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने प्रचारजीवी करार देते हुए कहा है कि यही प्रचारतंत्र उनके अंत यानी सरकार जाने का कारण बनेगा.

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अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘प्रचारजीवी’! जैसे अयोध्या जाने का रिकॉर्ड बनाकर भी अंततः मुख्यमंत्री जी को बदनामी के सिवा कुछ नहीं मिला वैसे ही ‘आत्म-प्रशंसा के झूठे विज्ञापनों पर 2.3 करोड़ प्रतिदिन ख़र्च करके भी मुख्यमंत्री जी को अपयश के सिवा कुछ नहीं मिला.’लखनऊ के अग्निकांड में अपने बच्चे को खोनेवाली ‘दुखी माँ’ से किये गये मुख्यमंत्री जी के दुर्व्यवहार का वीडियो जब पूरी दुनिया में देखा गया तो लोगों को वो पुराने वीडियो भी याद आ गए, जिसमें मुख्यमंत्री जी ने कोविड के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ ज़िलाधिकारी से अशोभनीय वार्तालाप किया था या फिर एक सत्यनिष्ठ प्रोफ़ेसर साहब और पत्रकार से दुर्वचन कहे थे.

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मुख्यमंत्री जी का कार्यकाल सदैव इस रूप में ही इतिहास में दर्ज़ होगा कि इन्हीं के समय में अयोध्या के प्रभुराम जी के मंदिर में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी हुई थी और आरोपियों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री जी ने जो दोषपूर्ण SIT बनाई थी, उस पर किसी को विश्वास नहीं था और उसके बाद दिल्ली ने अपनी SIT बनाई थी. इसके अतिरिक्त विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगाने, बुलडोज़र के दुरुपयोग व झूठे एनकाउंटर से प्रतिशोधात्मक राजनीति करने; पीडीए पर अत्याचार, ‘हाता नहीं भाता’ के घृणास्पद सत्य; लोगों के घर, दुकान व विश्वविद्यालय तक गिराने; भ्रष्टाचार के स्वर्ण-ठोसीकरण, हिरासत में मौतों के रिकार्ड व पुलिस व अन्य प्रशासन के अपराधीकरण के लिए भी मुख्यमंत्री जी का दुशासन काल नकारात्मक रूप से दर्ज़ होगा.

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आगे अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि और हां डबल इंजन की टकराहट की वजह से बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरतों की बदहाली के दौर के रूप में भी. बिना विचार के प्रचार से कुछ हासिल नहीं होता है. मुख्यमंत्री जी अकेले में बैठकर सचेत होकर सोचें तो उन्हें ये पता चलेगा कि : ‘उनका प्रचार तंत्र ही कर रहा है उनका अंत’