लखनऊ. चुनावी प्रक्रिया को लेकर चंद्रशेखर आजाद रावण का बड़ा बयान सामने आय़ा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों में “अनधिकृत” और “अवैध” कदम उठाए जाने की गंभीर आशंकाएं सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए बदलावों ने अनेक सवाल खड़े किए हैं.

आगे उन्होंने कहा कि 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निर्वाचन आयोग ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद फॉर्म-6 में बदलाव किया गया. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अब SIR से पहले वाला फॉर्म-6 मान्य है और जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन 5 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को न्यायालय ने मंजूरी नहीं दी है. यह अपने आप में बेहद चिंताजनक है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

इसे भी पढ़ें- ‘अब तो अयोध्या आते रहेंगे…’ रामनगरी बनेगा सपा का ‘वॉर रूम’, यही होगा सत्ताइस का सेंटर? क्या खिचड़ी पका रहे अखिलेश

नगीना सांसद ने कहा कि योगी सरकार से हमारी प्रमुख मांगें हैं कि SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएं, ताकि मतदाता सूची में अनियमितताओं से प्रभावित चुनावी प्रक्रिया पर जवाबदेही तय हो सके. इस पूरे मामले की जांच माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ की निगरानी में कराई जाए. यह पता लगाया जाए कि इस मामले में कौन-कौन लिप्त है, किसके निर्देश पर ये कदम उठाए गए और किन लोगों या राजनीतिक पक्षों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया. ज्ञानेश कुमार सहित सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों की जवाबदेही तय की जाए.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून में किए गए बदलाव रद्द किए जाएं. इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों के साथ-साथ धारा 16 में आधिकारिक कार्यों के संबंध में दिए गए कानूनी संरक्षण के प्रावधान की भी समीक्षा हो और इसे रद्द किया जाए, ताकि चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके तथा कानून के तहत जांच और कार्रवाई में अनुचित बाधाएं न आएं.

इसे भी पढ़ें- राम की आड़ में राजनीति! रामलला के दर्शन न करने को लेकर अखिलेश पर ओपी राजभर का तंज, जानिए क्यों कहा कि दाढ़ी-टोपी रूठ जाती

उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा हो. राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने. भविष्य में भी नियुक्तियों के जरिए निर्वाचन आयोग पर सत्ता का प्रभाव पड़ने की आशंका को समाप्त करने के लिए ऐसी पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें किसी भी सरकार को अपनी पसंद के व्यक्तियों की नियुक्ति करके इस संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता प्रभावित करने का अवसर न मिले.

नगीना सांसद ने ये भी कहा कि ईवीएम से चुनाव कराने की व्यवस्था समाप्त कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो तथा मतदाताओं का चुनाव प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो. लोकतंत्र में मतदाता सूची के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. देश की जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है.