लखनऊ. प्रतापगढ़ जिले के पट्टी कोतवाली में पुलिस हिरासत में 22 साल के युवक की मौत का मामला सामने आया है. जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. परिजनों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से युवक की जान गई है. उसने आत्महत्या नहीं की है. मामले में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण का बयान सामने आया है. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए जांच की मांग की है.

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि प्रतापगढ़ जिले के पट्टी कोतवाली में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय दलित अर्जुन गौतम की मृत्यु बेहद दुखद, गंभीर और चिंताजनक है. कोतवाली परिसर के शौचालय में अर्जुन का शव फंदे से लटका मिला. पुलिस इसे कंबल के फंदे से आत्महत्या बता रही है, जबकि मृतक के परिजनों के अनुसार पुलिस की पिटाई से अर्जुन की मृत्यु हुई है.

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आगे उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. हिरासत में मौजूद युवक तक कंबल कैसे पहुंचा? आखिर कंबल से फांसी कैसे लगाई जा सकती है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए. परिजनों के अनुसार, उन्हें अर्जुन से मिलने तक नहीं दिया गया. वहीं, अचेत अवस्था में मिलने के बाद उसे महज 700 मीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय करीब 25 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज क्यों ले जाया गया? इस पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा और पुलिस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि परिजनों का कहना है कि उनकी जानकारी के बिना अर्जुन का पोस्टमार्टम कराया गया. हम यूपी सरकार से मांग करते हैं कि मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए. कोतवाली परिसर और घटनास्थल के सभी CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित किए जाएं तथा पुलिस हिरासत में अर्जुन के साथ हुई पूरी घटना की जांच हो. साथ ही, परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जाए.

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चंद्रशेखर आजाद ने ये भी कहा कि एक परिवार ने अपना कमाऊ बेटा खो दिया है. हमारी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं. उन्हें न्याय मिले और जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. पुलिस हिरासत में हुई इस मृत्यु का सच सामने आना चाहिए. किसी भी परिवार को न्याय के लिए भटकना न पड़े, यह सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है.