लखनऊ. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के फैसले का विरोध करते हुए राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और उसकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग को बेचने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में, बैंकों के राष्ट्रीयकरण को बनाए रखने और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर 2 और 3 नवंबर को बैंक कर्मचारियों द्वारा की जा रही राष्ट्रव्यापी हड़ताल का भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पुरजोर समर्थन करती है.

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आगे उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की कुल 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है. 60 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी कंपनी को बेचने से बैंक का नियंत्रण विदेशी निवेशक के हाथों में चला जाएगा. कर्मचारी संगठनों के अनुसार, यह दिसंबर 2003 में संसद में दिए गए सरकार के उस आश्वासन का उल्लंघन है, जिसमें न्यूनतम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी.

चंद्रशेखर ने कहा कि बैंक का शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2021 के 1,513.97 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 9,209.97 करोड़ रुपये पहुंच गया है. माननीया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी, ऐसे में सवाल है कि जब आईडीबीआई बैंक लगातार मुनाफा कमा रहा है, तो उसे निजी हाथों में सौंपने की जरूरत ही क्या है? बैंकों का निजीकरण देश की आर्थिक संप्रभुता, आम जनता की जमा पूंजी और लाखों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है.

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चंद्रशेखर ने आगे ये भी कहा कि भारत सरकार निजीकरण का फैसला वापस ले और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे. बैंक कर्मचारियों का यह संघर्ष सार्वजनिक संस्थानों, जनहित और रोजगार की सुरक्षा का संघर्ष है. भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है.