लखनऊ. सपा सुप्रीमो पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अखिलेश जी, स्वाभिमान की परिभाषा सत्ता की कुर्सी से नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति समर्पण से तय होती है. मर्यादा की पहली पाठशाला परिवार होता है. मैं ख़ुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने इसका अपने परिवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में पूरी निष्ठा से पालन किया है, लेकिन आपका ‘पारिवारिक शिष्टाचार’ जगजाहिर है.

इसे भी पढ़ें- ‘शिक्षा के मंदिर’ में हवस का खेल! अवध विश्वविद्यालय में छात्राओं ने प्रोफेसर पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप, जानिए कांड के पीछे की पूरी कहानी…

आगे केशव मौर्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता संघर्ष की भट्ठी में तपकर निकलता है, वह किसी राजनीतिक खानदान की विरासत का मोहताज नहीं होता. उसके लिए पद अस्थायी होता है, लेकिन जनसेवा का संकल्प स्थायी, लेकिन परिवारवादी राजनीति के ‘नुमाइंदों’ की सोच अपने ‘कुनबे की चौखट’ तक ही सीमित होती है. उनकी सियासत कुनबे से शुरू होकर कुनबे पर ही दम तोड़ देती है.

इसे भी पढ़ें- अखिलेश यादव जी, करा लिए न घनघोर बेइज्जती? दिल्ली जाने को लेकर ओपी राजभर ने कसा तंज, राहुल गांधी और UP चुनाव पर दिया बड़ा बयान

केशव मौर्य ने ये भी कहा कि दरअसल, कुर्सी की इतनी फिक्र आपको इसलिए भी सता रही है, क्योंकि 2017 में हाथ से फिसली सत्ता की ‘टीस’ आज भी आपके दिलो-दिमाग पर छाई हुई है. आपकी यह टीस साल 2047 तक ऐसे ही बनी रहेगी, क्योंकि अपने कुशासन के कारण जो इतिहास के पन्नों में ‘पूर्व’ हो चुके हैं, वे अब हमेशा ‘पूर्व’ ही रहेंगे! हम सुशासन और विकास के संकल्प के साथ साल 2027 में 2017 दोहराएंगे और उत्तर प्रदेश में फिर से कमल खिलाएंगे! इसलिए स्वाभिमान की मत दीजिए दुहाई, क्योंकि 2027 में जनता करेगी प्रदेश से सपा की सफाई.