सतीश सिंह, लखनऊ. आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन स्थल पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए पुलिसिया बर्बरता का सहारा लिया है. संजय सिंह ने कहा कि 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को उनकी मांगों पर संवाद करने के बजाय ज़बरन हिरासत में लेकर अस्पताल भेज दिया गया, जो लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है.

संजय सिंह ने कहा कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज़ उठा रहे थे, जिनका भविष्य कथित तौर पर विभिन्न परीक्षा पत्र लीक की घटनाओं से प्रभावित हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि इतने दिनों के अनशन के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्र सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे संवाद करने नहीं पहुंचा. सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें अनशन स्थल से हटाने का रास्ता चुना.

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आप सांसद ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को भारी पुलिस बल ने जंतर-मंतर को चारों ओर से घेर लिया और वहां मौजूद युवाओं के साथ बल प्रयोग किया गया. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को ज़बरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. संजय सिंह ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर केंद्र सरकार घबराई हुई है. संजय सिंह के मुताबिक, संसद मार्च को रोकने के लिए आंदोलन को कुचलने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि इसी उद्देश्य से दिल्ली पुलिस में शीर्ष स्तर पर बदलाव किए गए हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए संजय सिंह ने कहा कि सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं होता. उन्होंने कहा, “जिस युवा शक्ति पर आज लाठियां बरसाई जा रही हैं, वही आने वाले समय में भाजपा की सत्ता के अहंकार को समाप्त करेगी.” उन्होंने देश के युवाओं से सोनम वांगचुक के समर्थन में एकजुट होने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करने की अपील भी की. आम आदमी पार्टी ने इस पूरी घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है.