लखनऊ. संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने स्पाइनल सर्जरी के दौरान मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नया उपकरण विकसित किया है. स्पाइन-ड्रिलिंग सेफ्टी डिवाइस नामक इस उपकरण को विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश मौर्य ने डिजाइन किया है और इसका पेटेंट भी कराया गया है.

इसे भी पढ़ें- देहरादून जाने वाली यूपी रोडवेज बसों पर संकट! 26 टाइम स्लॉट मांगे, उत्तराखंड ने सिर्फ 5 पर दी हामी

यह डिवाइस विशेष रूप से स्प्लिट कॉर्ड मैलफॉर्मेशन टाइप-1 (स्पाइनल कॉर्ड की एक दुर्लभ जन्मजात समस्या) में बोनी स्पर (हड्डी का बढ़ा हुआ हिस्सा) की सुरक्षित ड्रिलिंग के लिए उपयोगी है. यह समस्या ज्यादातर बच्चों में पाई जाती है. तेजी से बढ़ने के दौरान बोनी स्पर स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचाने लगता है. सर्जरी के दौरान इस बोनी स्पर को हटाना पड़ता है, ताकि बढ़ते स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान से बचाया जा सके.

नया डिवाइस बोनी स्पर की ड्रिलिंग के दौरान सुरक्षा की अतिरिक्त परत प्रदान करता है. यह स्पाइनल कॉर्ड की ओर गर्मी के ट्रांसमिशन को कम करता है और ड्रिल तथा न्यूरल टिश्यू के बीच गलती से होने वाले सीधे संपर्क को भी कम करता है.

इसे भी पढ़ें- मथुरा में भाभी के प्यार में 18 साल के युवक ने दी जान, मौत से पहले बनाया वीडियो; 3 लोगों पर लगाए गंभीर आरोप

सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश और बिहार में

न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अवधेश कुमार जायसवाल के मुताबिक, स्पाइनल डिसरैफिज्म के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश और बिहार में देखे जाते हैं. भारत सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इन राज्यों में इस समस्या को खत्म करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें फोलेट (विटामिन बी-9) के साथ फूड फोर्टिफिकेशन भी शामिल है. इस डिवाइस को जल्द ही रूटीन स्पाइनल सर्जिकल प्रैक्टिस में शामिल किया जाएगा. एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक प्रो. (पद्म श्री) आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि के लिए न्यूरोसर्जरी विभाग को बधाई दी. उन्होंने स्वदेशी मेडिकल इनोवेशन, सर्जिकल रिसर्च और मरीजों की सुरक्षा के प्रति लगातार प्रतिबद्धता के महत्व पर जोर दिया.