रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. घर की छत और आंगन से दूर, जेल की चारदीवारी के भीतर भी करवा चौथ पर प्रेम, आस्था और प्रतीक्षा का रंग दिखाई दिया. जिला कारागार में 20 महिला बंदियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा. दिनभर बिना अन्न-जल के रहकर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपनों की सलामती की दुआ मांगी.

बता दें कि सुबह से ही महिला बैरकों में पर्व की तैयारी शुरू हो गई थी. व्रत रखने वाली बंदियों को पूजा में कोई परेशानी न हो, इसके लिए जेल प्रशासन ने पूजन सामग्री और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं. साफ-सफाई और व्यवस्था का ध्यान रखा गया. जेल कर्मचारियों ने भी दिनभर बंदियों का सहयोग किया, जिससे वे शांतिपूर्वक पूजा कर सकें.

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जेल अधीक्षक प्रभात सिंह ने बताया कि जिन महिला बंदियों के पति भी जेल में निरुद्ध हैं, उनकी मुलाकात कराने की व्यवस्था की गई. जेल से बाहर रह रहे पतियों से मिलने के लिए भी विशेष समय तय किया गया, ताकि महिलाएं पर्व के दिन उनसे मिल सकें और व्रत का समापन कर सकें.

शाम को चांद निकलने के बाद महिलाओं ने अर्घ्य देकर व्रत खोला. पति से मुलाकात के दौरान कई बंदियों की आंखें नम हो गईं. किसी के लिए वे कुछ पल साथ बिताने का अवसर थे, तो किसी के लिए परिवार का हाल जानने का. घर की छत पर चांद देखने की परंपरा भले ही यहां संभव न रही, लेकिन मन में अपनों के लिए प्रेम और विश्वास वैसा ही बना रहा.

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करवा के दिन बैरकों का माहौल आम दिनों से अलग था, बंदियों के लिए यह पर्व अपने परिवार से जुड़ने और उम्मीद बनाए रखने का अवसर बना. जेल प्रशासन की व्यवस्था ने दूरी को पूरी तरह मिटाया तो नहीं, लेकिन मुलाकात के जरिए उसे कुछ कम जरूर किया.