रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. रायबरेली शहर में ‘यादव महासभा’ के नाम से लगी होर्डिंग्स ने समाजवादी पार्टी के भीतर की आंतरिक खींचतान को उजागर कर दिया है. पोस्टर में सपा जिलाध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र यादव पर समाज विरोधी होने का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें समाज से निष्कासित करने की बात कही गई है.

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होर्डिंग के बाद से न केवल राजनीतिक चर्चाएं गर्म हैं, बल्कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी इन पोस्टरों के पीछे छिपे ‘यादव महासभा’ के अध्यक्ष और सूत्रधारों की तलाश में जुट गए हैं. सदर विधानसभा से सपा के पूर्व प्रत्याशी आरपी यादव समेत 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने का प्रकरण जुड़ा है सजा के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद जिलाध्यक्ष द्वारा सोशल मीडिया पर व्यक्त की गई संवेदना को लेकर विरोधियों ने सवाल उठाने शुरू किए थे.

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दूसरी ओर जिलाध्यक्ष समर्थकों का दावा है कि उनके कार्यकाल में पार्टी ने चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. ऐसे में बिना किसी स्पष्ट चेहरे या आधिकारिक पदाधिकारी के सामने आए, इस तरह के बैनर लगवाने को समर्थक एक राजनीतिक साजिश मान रहे हैं. फिलहाल 2027 के चुनावों से पहले इस विवाद ने स्थानीय सियासत का तापमान बढ़ा दिया है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन अज्ञात चेहरों के सामने आने पर आगे क्या राजनीतिक मोड़ आता है.