सिद्धार्थनगर. गौतम बुद्ध की धरती सिद्धार्थनगर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास के साथ-साथ बड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया. बांसी के राजा रतन सेन इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में 311 करोड़ रुपये से अधिक की 107 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर के पिछले वर्षों के बदलाव को अपनी सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा. वहीं, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जाति के नाम पर समाज को बांटने और युवाओं के सामने पहचान का संकट पैदा करने का आरोप लगाया.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 2500 वर्ष पहले जिस क्षेत्र की अपनी समृद्ध पहचान थी, वह आजादी के बाद लंबे समय तक विकास के लिए तरसता रहा. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और आधारभूत सुविधाओं के मामले में पिछड़ने के कारण सिद्धार्थनगर आकांक्षी जिले की श्रेणी में पहुंच गया. उन्होंने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में तस्वीर बदली है और अब सिद्धार्थनगर आकांक्षी नहीं, बल्कि विकास की अग्रणी पंक्ति में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

योगी ने कहा कि देश के 112 आकांक्षी जिलों में सिद्धार्थनगर ने बेहतर प्रदर्शन किया है. नीति आयोग से 25 करोड़ रुपये का पुरस्कार मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में लगातार प्रयास किए जाएं तो पिछड़ा माना जाने वाला क्षेत्र भी विकास के नए मानक स्थापित कर सकता है. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, कनेक्टिविटी और ग्रामीण विकास को सिद्धार्थनगर के बदलाव का आधार बताया. उनका जोर इस बात पर रहा कि विकास केवल राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी समान अवसर पहुंचने चाहिए.

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काकोरी से सिद्धार्थनगर तक जोड़ा ‘राष्ट्रवाद’ का नैरेटिव

मुख्यमंत्री के भाषण में काकोरी ट्रेन एक्शन का भी खास असर दिखाई दिया. उन्होंने नौ अगस्त 1925 को हुई काकोरी की घटना को याद करते हुए राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद और राजेंद्र लाहिड़ी समेत क्रांतिकारियों को नमन किया. उन्होंने कहा कि इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खजाने को देश की आजादी के संघर्ष में लगाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काकोरी की घटना को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के रूप में सम्मान देने का काम किया गया. यहां से मुख्यमंत्री ने सीधे मौजूदा राजनीति को जोड़ते हुए कहा कि आजादी के बाद सत्ता में आने वालों ने क्रांतिकारियों के योगदान को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया और कई महापुरुषों को भुला दिया गया.

जाति की राजनीति पर कांग्रेस-सपा को घेरा

योगी ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा विपक्षी राजनीति पर केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि भारत की गुलामी के पीछे समाज का आंतरिक विभाजन भी एक बड़ा कारण था. जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने की प्रवृत्ति ने देश को कमजोर किया. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी आज भी इसी तरह की राजनीति कर रही हैं. उन्होंने कहा कि समाज को बांटने के बजाय विकास और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की जरूरत है. योगी का यह बयान ऐसे समय आया जब प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण और सामाजिक भागीदारी बड़े राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं. ऐसे में सिद्धार्थनगर जैसे पूर्वांचल के जिले से मुख्यमंत्री का यह संदेश भाजपा के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा माना जा रहा है.

पहले युवा पहचान के लिए परेशान था

मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश के युवाओं के सामने कानून-व्यवस्था, रोजगार और पहचान का संकट था. आज सरकार ने ऐसा वातावरण तैयार किया है, जिसमें युवा नौकरी के साथ-साथ उद्यम और स्टार्टअप की ओर भी बढ़ रहे हैं. योगी ने दावा किया कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को जॉब क्रिएटर बनाने का भी है. मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप, स्वरोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार अवसर दिए जा रहे हैं.

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गांव-कस्बों में बनेगा माहौल

मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर के युवाओं को लेकर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यूपीएससी, यूपीपीएससी, नीट, जेईई, नेट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए वर्चुअल और फिजिकल कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि इन कक्षाओं में आईएएस, पीसीएस अधिकारी, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे सफल लोग युवाओं को पढ़ाएंगे और मार्गदर्शन देंगे. इसका उद्देश्य ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की मजबूरी से बचाना है.

कानून-व्यवस्था को बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को भी अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में दंगे और कर्फ्यू की स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले युवाओं को कई क्षेत्रों में आने-जाने में डर लगता था, जबकि आज प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है. उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण निवेश, रोजगार और विकास के लिए जरूरी है. कानून-व्यवस्था में सुधार का सीधा लाभ युवाओं, व्यापारियों और निवेशकों को मिल रहा है.

सिद्धार्थनगर को कनेक्टिविटी से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के विकास में बेहतर कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है. सड़क परियोजनाओं और बड़े मार्गों से सिद्धार्थनगर को जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं, बल्कि इनके साथ उद्योग, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के अवसर भी आते हैं. गौतम बुद्ध से जुड़ी पहचान को देखते हुए सिद्धार्थनगर में पर्यटन की संभावनाओं पर भी सरकार का फोकस है. मुख्यमंत्री ने विकास को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत ढांचे के साथ जोड़ने की बात कही.