लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई के बीच बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मौसम विभाग ने शनिवार(10 अक्टूबर 2026) को प्रदेश के 30 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है. पिछले 24 घंटे के दौरान मेरठ और बरेली समेत आठ शहरों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे. मुजफ्फरनगर में बिना बारिश के ही मटर के दाने के बराबर ओले गिरने की सूचना है.

इसे भी पढ़ें- 1 करोड़ का बीमा और बच्चों को 8 लाख… यूपी सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा, जानिए किसे और कैसे मिलेगा फायदा

दूसरी ओर, नदियों का बढ़ता जलस्तर और कटान कई जिलों में तबाही मचा रहा है. लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार 11वें दिन बढ़ने से रिहायशी इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया है. गोंडा में घाघरा और लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के उफान से ग्रामीणों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है.

30 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 30 जिलों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है. पिछले 24 घंटे में आठ शहरों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. इससे मौसम में बदलाव के साथ जनजीवन भी प्रभावित हुआ है.

लखनऊ में गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ा

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर 11वें दिन भी बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं. फैजुल्लागंज में करीब 40 हजार घरों में पानी भरने की खबर है. चंद्रिका देवी मंदिर बाढ़ के पानी से घिर गया है, जबकि रिवर फ्रंट और बैकुंठ धाम में भी पानी भर गया है. प्रशासन ने रिवर फ्रंट को अगले आदेश तक बंद कर दिया है.

गोंडा के आठ गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

गोंडा में घाघरा नदी उफान पर है. आठ गांवों में पानी घुसने से सात हजार से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं. लोगों को सुरक्षित ठिकानों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

इसे भी पढ़ें- बीजेपी को टाटा-बाय-बाय बोलने के बाद पूर्व सांसद ने दिया इस्तीफा, जानिए क्यों फूटा धर्मेंद्र कश्यप का गुस्सा

लखीमपुर खीरी में कटान से घर और मंदिर नदी में समाए

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से अब तक 13 घर और चार मंदिर नदी में समा चुके हैं. वहीं, वाराणसी, प्रयागराज, बहराइच और बाराबंकी समेत प्रदेश के 32 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बताए गए हैं. मौसम विभाग के शुरुआती अनुमान के विपरीत, 26 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई. लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण इलाकों में घरों और आजीविका पर संकट बढ़ा दिया है.