वीरेंद्र कुमार, नालंदा। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी राजगीर के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) का तीन दिवसीय राज्यस्तरीय विमर्श शिविर शुरू हो चुका है। इस शिविर में पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठन के विस्तार, सामाजिक न्याय की विचारधारा और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।

सामाजिक न्याय की विरासत और नीतीश कुमार का योगदान
शिविर के पहले दिन उपेंद्र कुशवाहा ने समता पार्टी के शुरुआती दौर को याद करते हुए समाजवादी विचारधारा और जननायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में अभूतपूर्व विकास हुआ है। कुशवाहा ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से भविष्य में फुर्सत लेने के बाद, सामाजिक न्याय की इस बड़ी विरासत को संभालने को लेकर लोगों के मन में सवाल है, और उनकी पार्टी इस जिम्मेदारी को पूरी मजबूती से निभाने के लिए तैयार है।
एनडीए में अटूट विश्वास और विलय की चर्चाओं पर विराम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विलय की चल रही अफवाहों पर उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में विराम लगा दिया। उन्होंने साफ किया कि पार्टी के विलय को लेकर भाजपा की तरफ से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है और कुछ लोगों के व्यक्तिगत सुझाव को पार्टी ने खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएलएम का अपना स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व हमेशा कायम रहेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी मजबूती के साथ एनडीए का हिस्सा है और गठबंधन की विविधता ही इसकी असली ताकत है।
सांगठनिक मजबूती और डिजिटल तकनीक का उपयोग
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में हिस्सेदारी हमेशा ताकत के आधार पर मिलती है, इसलिए संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि बीस सूत्री समितियों और निगमों में कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व मिलना शुरू हो गया है। इसके अलावा, इस शिविर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पार्टी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।

