Bihar news: ​बिहार की सियासत में एक बार फिर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ (रालोमो) और भारतीय जनता पार्टी के बीच का समीकरण चर्चा में है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसमें भाजपा द्वारा रालोमो को एक एमएलसी सीट देने का वादा किया गया था। यह मामला तब तूल पकड़ा जब एनडीए और राजद कोटे से सभी 10 उम्मीदवारों के एमएलसी बनने के बाद भी रालोमो को खाली हाथ रहना पड़ा।

​क्या मंत्री पद बरकरार रख पाएंगे दीपक प्रकाश?

​इस घटनाक्रम के केंद्र में रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश हैं। एमएलसी नहीं बन पाने के कारण अब तकनीकी रूप से उनके मंत्री पद पर बने रहने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जब मीडिया ने उपेंद्र कुशवाहा से इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में गेंद भाजपा के पाले में डाल दी। कुशवाहा ने कहा कि इस बारे में भाजपा द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा चुकी है और सब कुछ सार्वजनिक है, इसलिए अब उन्हें अलग से टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपक प्रकाश का मंत्री पद बना रहेगा या नहीं, यह फैसला पूरी तरह से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को करना है।

​विलय की अटकलों को किया खारिज

​राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के भाजपा में विलय की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि रालोमो के विलय का सवाल ही नहीं उठता। कुशवाहा ने दोहराया कि वे एनडीए का हिस्सा हैं और आगे भी इसी गठबंधन में बने रहेंगे।

​क्या था भाजपा का आधिकारिक रुख?

​दूसरी ओर, इस विवाद पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने सफाई दी है। जायसवाल, जो उस समय प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे जब यह वादा किया गया था, उन्होंने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय नेतृत्व की उपेंद्र कुशवाहा से कुछ बातें तय हुई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि इसी आधार पर वादा किया गया था। हालांकि, उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि बाद के घटनाक्रमों और उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा सांसद बनने के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व ही स्पष्टीकरण दे सकता है कि आगे क्या बातचीत हुई।
​यह घटनाक्रम एनडीए के भीतर समन्वय और वादों के क्रियान्वयन को लेकर चल रहे आंतरिक मंथन को दर्शाता है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।