अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने सासाराम में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और उसके नेतृत्व पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। कुशवाहा ने राजद में मची आंतरिक भगदड़ को पार्टी के पतन की शुरुआत करार देते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राजद एक ध्वस्त पार्टी: कुशवाहा
उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल अब एक संगठित राजनीतिक शक्ति नहीं, बल्कि एक ‘ध्वस्त पार्टी’ बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर मची भगदड़ और नेताओं का मोहभंग होना इस बात का प्रमाण है कि राजद का जनाधार अब बिखर रहा है। उनके अनुसार, पार्टी की आंतरिक स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिससे कार्यकर्ता और नेता दोनों ही हताश होकर पार्टी छोड़ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी और गायब रहने का मुद्दा
कुशवाहा ने अपने संबोधन का मुख्य केंद्र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को बनाया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, बिहार में अभी चुनावी सरगर्मी तेज है, कई जगह उपचुनाव की आहट है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का कहीं कोई अता-पता नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि नेता प्रतिपक्ष का संवैधानिक और नैतिक दायित्व होता है कि वे सरकार की कमियों को उजागर करें और जनता की समस्याओं को सदन व सड़क पर रखें। लेकिन, तेजस्वी यादव इन जिम्मेदारियों से पूरी तरह किनारा किए हुए हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा वह विदेश में हैं या कहां हैं, इसकी जानकारी न तो बिहार की जनता को है और न ही विपक्ष को। उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हम सम्मान करते हैं, लेकिन एक जिम्मेदार पद पर रहने के नाते उन्हें अपनी जवाबदेही भी समझनी चाहिए।
जनता के दुख-दर्द से नहीं है कोई सरोकार
उपेंद्र कुशवाहा ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति और जनता के प्रति उदासीनता ही राजद के भीतर मची भगदड़ का असली कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद नेतृत्व को बिहार की जनता के दुख-दर्द से कोई मतलब नहीं है, और यही कारण है कि आज पार्टी वेंटिलेटर पर है। कुशवाहा का यह बयान आगामी चुनावों से पहले बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

