करनाल। हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा कस्बे से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां बीते मई महीने में आयोजित हुई भव्य शिव महापुराण कथा को समाप्त हुए भले ही एक महीना बीत चुका है, लेकिन इसे लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस धार्मिक आयोजन के आय-व्यय यानी कुल कमाई और खर्चे के हिसाब-किताब को लेकर बड़ा झगड़ा सामने आ गया है। स्थानीय नगरखेड़ा सभा ने नई अनाज मंडी की मैनेजमेंट कमेटी द्वारा दिए गए लेखा-जोखा पर गहरे सवाल उठाए हैं और इस पर अपना कड़ा असंतोष जताया है। सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने तो अपने स्तर पर जनता के सामने एक-एक पैसे का हिसाब साफ कर दिया है, लेकिन मंडी कमेटी का हिसाब पूरी तरह उलझा हुआ है।
शुरुआत से ही विवादों में रहा था प्रदीप मिश्रा की कथा का आयोजन
आपको बता दें कि घरौंडा में 17 से 23 मई तक मशहूर कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का आयोजन किया गया था। इस बड़े आयोजन की शुरुआत में ही वीआईपी पास (VIP Pass) बेचने के गंभीर आरोपों को लेकर भारी हंगामा खड़ा हो गया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि एक समय पर कथा के रद्द होने की नौबत तक आ गई थी। इसके बाद कथा शुरू होने से ठीक दो-तीन दिन पहले नगरखेड़ा मंदिर में समाज के मौजिज लोगों की एक आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि इस धार्मिक आयोजन को हर हाल में पूरा कराया जाएगा। इसी सामूहिक प्रयास के चलते कथा शांतिपूर्वक संपन्न हो सकी थी।
नगरखेड़ा सभा ने बुलाई प्रेसवार्ता
इस पूरे विवाद के बीच घरौंडा नगरखेड़ा सभा के मुख्य पदाधिकारियों वीर सिंह, श्रीपाल, जोगिंदर पप्पू, जवाहर सिंह और अमित राणा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) बुलाई। इस दौरान उन्होंने बकायदा कागजात दिखाते हुए कथा के खर्चों का पूरा ब्यौरा पेश किया। पदाधिकारियों ने बताया कि समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से कुल 89 लाख 41 हजार 328 रुपए का दान इकट्ठा हुआ था। इसमें से 61 लाख 1 हजार रुपए की भारी रकम कथा की मुख्य मैनेजमेंट टीम को नगरखेड़ा मंदिर के परिसर में ही सबके सामने सौंप दी गई थी।
पंडित प्रदीप मिश्रा की फीस और टेंट के खर्चे का भी हुआ बड़ा खुलासा
सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि कथा वाचन के लिए पंडित प्रदीप मिश्रा की टीम को दो किस्तों में 15 लाख रुपए और 9 लाख रुपए की राशि दी गई थी। इसके अलावा मुख्य टेंट के भुगतान के लिए मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य राजिंद्र जैन को 6 लाख रुपए नकद सौंपे गए थे। वहीं एक लाख एक हजार रुपए बिल्ले लाला जी को दिए गए। सभा के अनुसार कुल राशि में से सारे खर्चे निकालने के बाद 28 लाख 40 हजार 328 रुपए बचे थे। इसमें से दादा खेड़ा के नाम से जारी ऑनलाइन स्कैनर (Online QR Code Scanner) पर 17 लाख 9 हजार 900 रुपए सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुए थे। इस डिजिटल भुगतान को घटाने के बाद 11 लाख 30 हजार 728 रुपए नकद शेष बचे थे। इसके बाद राणा रिसॉर्ट में सुरक्षा के लिए बुलाए गए बाउंसरों के ठहरने, गाड़ियों के डीजल और भोजन पर 84 हजार 700 रुपए खर्च हुए।
भंडारे के खर्च के बाद बचे 8.81 लाख रुपए नगरखेड़ा प्रधान को सौंपे
पदाधिकारियों ने आगे बताया कि कथा की समाप्ति पर नगरखेड़ा मंदिर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था, जिसमें कुल 1 लाख 63 हजार 688 रुपए का खर्च आया। इस अंतिम खर्चे के बाद समाज के दान में से कुल 8 लाख 81 हजार 998 रुपए की नगद राशि शेष बच गई, जिसे पूरी ईमानदारी के साथ नगरखेड़ा सभा के प्रधान को सुरक्षित सौंप दिया गया है। सभा ने अपना पक्ष पूरी तरह साफ करते हुए जनता के सामने रख दिया है।
मंडी कमेटी के गोलमोल हिसाब पर भड़की सभा, प्रधान जयभगवान से मांगा जवाब
नगरखेड़ा सभा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कथा खत्म होने के बाद मंडी प्रधान जयभगवान गोयल ने वादा किया था कि सभी काम पूरे होने पर दोनों कमेटियां साथ बैठकर पूरा हिसाब करेंगी। लेकिन बाद में मंडी कमेटी की तरफ से जो लिखित पर्चा दिया गया, वह किसी के समझ में नहीं आ रहा है। सभा का आरोप है कि टेंट वाले को फाइनल पेमेंट (Final Payment) करते समय कमेटी के बाकी सदस्यों को जानबूझकर नहीं बुलाया गया। किसे कितना पैसा दिया गया, इसकी कोई स्पष्ट रसीद नहीं है। सभा का कहना है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता यानी ईमानदारी और स्पष्टता की भारी कमी है, जिसका जवाब मंडी प्रधान जयभगवान गोयल को सार्वजनिक रूप से समाज के सामने देना होगा।

