इमरान खान, खंडवा। एमपी के खंडवा नगर निगम की साधारण सभा में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब विपक्ष सूरजकुंड वार्ड के रहवासियों को साथ लेकर पहुंचा। ये रहवासी हाल ही में रेलवे की ओर से अतिक्रमण बताकर तोड़े गए निर्माण को लेकर नाराज थे। लोगों का कहना है कि वे वर्षों से निगम को टैक्स देते आए हैं, ऐसे में अब उनके आशियाने टूटने के बाद उन्हें वैकल्पिक मकान दिया जाना चाहिए।
खंडवा नगर निगम की बैठक में शहर विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन भारी हंगामे के चलते अधिकांश विषयों पर बात नहीं हो सकी। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच धक्का-मुक्की तक हो गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर निगम परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। हंगामे के बीच ही करीब 883 करोड़ रुपए से अधिक का बजट पारित कर दिया गया।
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विपक्ष का आरोप है कि पुलिस के जरिए जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। वहीं महापौर अमृता यादव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका काम सिर्फ हंगामा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम की बैठक में रेलवे का मुद्दा उठाना विपक्ष की कमजोर समझ को दर्शाता है। कुल मिलाकर, विकास की चर्चा के बजाय यह सभा राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बनकर रह गई।


