सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में मिलने वाले निःशुल्क प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि RTE की सीटों में भारी कमी किए जाने से करीब 59 हजार गरीब परिवारों के बच्चे निशुल्क शिक्षा से वंचित हो गए हैं।

RTE में यह कैसा खेल- राजीव गुप्ता

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस मामले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि RTE में यह कैसा खेल हुआ है। उनके मुताबिक प्रदेश में RTE के तहत सीटों की संख्या करीब 85 हजार से घटाकर 26 हजार कर दी गई है। उनका कहना है कि इससे गरीब परिवारों के बच्चों के निजी स्कूलों में पढ़ने और अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा पाने के अवसर पर असर पड़ा है।

नर्सरी में प्रवेश बंद होने पर भी सवाल

राजीव गुप्ता के मुताबिक पहले RTE के तहत प्रवेश के दो रास्ते थे, लेकिन अब इसे घटाकर एक कर दिया गया है। पहले नर्सरी स्तर पर भी प्रवेश का प्रावधान था, लेकिन अब सीधे कक्षा पहली से प्रवेश दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि RTE के तहत पहले से अध्ययनरत बच्चा कक्षा पहली में पहुंचता है, जबकि दूसरे बच्चे को तीन साल बाद कक्षा पहली में पहुंचने का मौका मिलता है। ऐसे में दोनों बच्चों की योग्यता और ज्ञान में अंतर पैदा हो सकता है।

कोर्ट में पहुंचा मामला

एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले को लेकर वे कोर्ट गए हैं। उनका दावा है कि शिक्षा विभाग ने कोर्ट में लिखित रूप से कहा है कि इसके लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

59 हजार बच्चों को नुकसान

उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिक स्तर पर एक बच्चे के लिए करीब 7 हजार रुपये सालाना, जबकि मिडिल स्तर पर करीब 14 हजार रुपये सालाना फीस दी जाती है। राजीव गुप्ता ने कहा कि इस साल RTE की सीटों में कमी के कारण गरीब परिवारों के 59 हजार बच्चों को नुकसान हुआ है। अब एसोसिएशन को कोर्ट से उम्मीद है कि गरीब परिवारों के बच्चों को फिर से निजी स्कूलों में निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।

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