पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद हुए सिख दंगा मामले में दोषी रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है. लेकिन उनके निधन पर श्रद्धांजलि को लेकर सियासी बवाल खड़ा हो गया है. कांग्रेस के नेताओं ने निधन को क्षति बताया तो वहीं बीजेपी ने इस पर पलटवार किया है. बीजेपी ने इसे 1984 के सिख-विरोधी दंगों पीड़ितों के परिवार का अपमान बताया है.

इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शुक्रवार (21 अगस्त) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस हमारे सिख समुदाय के हत्यारों की तारीफ कैसे कर सकती है.

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए प्रदीप भंडारी ने आगे कहा कि ये राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान वाली असली सोच है और इससे सिख समुदाय के प्रति कांग्रेस की नफरत साफ जाहिर होती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को 1984 के सिख-विरोधी दंगों के हजारों पीड़ितों का अपमान करने और पीड़ितों के परिवारों व बचे हुए लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए माफी मांगनी चाहिए.

कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

बता दें कि, 1984 के सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराते हुए उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2018 में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. इसके साथ ही 12 फ़रवरी, 2025 को एक अदालत ने पूर्व कांग्रेस सांसद को दिल्ली में दो सिखों की हत्या के मामले में उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. वो तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहे थे.

दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर बवाल

कांग्रेस सांसद और हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार को लेकर न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “आज देश के राजनीतिक क्षितिज पर एक अपूरणीय क्षति हुई है.” हुड्डा ने आगे कहा कि उन्हें (सज्जन कुमार) को देशभर में एक आदर्श के तौर पर देखा जाता है.

हुड्डा के बयान से भड़के आरपी सिंह

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस के लिए एक हत्यारा रोल मॉडल हो सकता है. उन्होंने कहा कि उस पार्टी से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसके अपने प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिल्ली में लगभग 3,000 बेगुनाह सिखों की हत्या को सही ठहराते हुए कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती थोड़ी हिलती है.

आरपी सिंह ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बेटों, पतियों, पिताओं और भाइयों को खो दिया जिनमें से कई को जिंदा जला दिया गया था उनके लिए यह धरती का थोड़ा हिलना नहीं था. यह उनकी पूरी जिंदगी की बर्बादी थी. आज जब कांग्रेस नेता 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के दोषी सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताते हैं, तो वे साफ तौर पर दिखाते हैं कि कांग्रेस 1984 को कैसे याद करती है.

‘1984 के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रही कांग्रेस’

बीजेपी नेता ने साफ किया कि सिख कभी 1984 को नहीं भूलेंगे. दिल्ली में लगभग 3,000 बेगुनाह सिख मारे गए थे. उनके खून और उनके परिवारों के दर्द को राजनीतिक श्रद्धांजलि से नहीं मिटाया जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि हत्याओं के दोषियों पर शोक मनाकर और उन्हें महिमामंडित करके कांग्रेस किसी विरासत का सम्मान नहीं कर रही है, बल्कि 1984 के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है.

दिल्ली हाई कोर्ट का जिक्र कर क्या बोले फूलका

वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने कहा, “कांग्रेस पार्टी में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है. आज भी वे सज्जन कुमार जैसे लोगों को आदर्श मानते हैं. पीड़ितों द्वारा उनके खिलाफ कई हलफनामे दाखिल करने और उन पर हमलों का नेतृत्व करने का आरोप लगाने के बावजूद सज्जन कुमार को संरक्षण दिया गया.”

उन्होंने कहा कि 2010 में 18 साल बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बीएस चून को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया. उन्होंने पाया कि आरोप पत्र एक अन्य मामले के रिकॉर्ड के साथ रखा गया था. आरोपपत्र अदालत में दाखिल नहीं किया गया. सज्जन कुमार को क्लीन चिट दे दी गई. कांग्रेस आज भी सज्जन कुमार जैसे लोगों को आदर्श मानती है.

अपने बैरेक में बेहोशी की हालत में मिले थे सज्जन

गुरुवार 20 अगस्त (2026) को सफ़दरजंग अस्पताल ने एक बयान जारी कर बताया है कि 84 वर्षीय सज्जन कुमार को पुलिस सुबह क़रीब 11 बजे बेहोशी की हालत के साथ वीएमएमसी और सफ़दरजंग अस्पताल लाई थी, उन्हें तुरंत एडमिट किया गया और होश में लाने के उपाय शुरू किए गए. “सभी ज़रूरी मेडिकल और लाइफ़-सपोर्ट उपाय करने के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोपहर 12:30 बजे उनकी मौत हो गई. उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसंस बीमारी थी और पहले भी वो कई बार हॉस्पिटल में भर्ती हो चुके थे.”

सज्जन कुमार कौन थे?

सज्जन कुमार कांग्रेस के नेता रहे हैं और 1970 के दशक से दिल्ली की राजनीति में सक्रिय थे. सज्जन ने सबसे पहले 1977 में दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ा और पार्षद चुने गए. 1980 में सज्जन कुमार ने लोकसभा चुनावों में चौधरी ब्रह्म प्रकाश को शिकस्त दी और पहली बार सांसद बने.

सज्जन कुमार पर 1984 में सिख दंगों में शामिल होने का आरोप लगा और उसी साल हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया. 1991 में सज्जन एक बार फिर सांसद चुने गए. लेकिन इसके बाद उन्हें संसद में घुसने के लिए 13 साल इंतज़ार करना पड़ा. साल 2004 में उन्हें कांग्रेस ने लोकसभा का टिकट दिया. सज्जन ने बाहरी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए. साल 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.

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