शिखिल ब्यौहार, भोपाल। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। बीजेपी जहां विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहरा रही है वही बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी आरोपों पर सवाल खड़े कर पलटवार कर रहे हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए साफ कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए,इसे जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दों से जोड़कर टाला नहीं जाना चाहिए।
सपा के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक (संविधान का 106वां संशोधन) एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन इसका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब 2024 के लोकसभा चुनाव में इसे लागू करने का अवसर था, तब सरकार ने इसे लागू क्यों नहीं किया।
समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह शुरू से ही महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और संसद में इस बिल का समर्थन भी किया था। पार्टी का कहना है कि महिलाओं को “कभी न कभी” नहीं, बल्कि मौजूदा लोकसभा और विधानसभा सीटों में तुरंत एक-तिहाई आरक्षण दिया जाना चाहिए। मनोज ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर अनिश्चित समय के लिए टाल दिया है, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और रैलियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ठोस नीतियों और समयबद्ध फैसलों के जरिए जमीन पर उतारा जाना जरूरी है।
सरकार नहीं खरीद रही किसानों की उपज
समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश की गेहूं खरीदी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। मनोज यादव ने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी और ई-उपार्जन पोर्टल में कैपिंग जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आरोप है कि दो हेक्टेयर तक के किसानों को प्राथमिकता देने और खरीदी केंद्रों पर सीमाएं तय करने से बड़े किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा 2700 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता में किसान 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल पर फसल बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है और सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

