अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है. अमेरिका ने लगातार सातवें दिन शुक्रवार 17 जुलाई 2026 को दोपहर (भारतीय समयानुसार शनिवार तड़के 12:30 बजे) ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए. अमेरिका द्वारा हुए भीषण बमबारी के चलते राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास बंदरगाह और केश्म द्वीप समेत कई ईरानी ठिकानों पर रातभर भयंकर धमाके गूंजते रहे.

अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरानी सरजमीं को दहला दिया है. इन हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा चरम पर पहुंच गया है.

अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को ईरान पर लगातार सातवीं रात हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंटकॉम ने इसकी पुष्टि की है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका अपने हवाई हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है. 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ये हवाई हमले किए जा रहे हैं. जिसका साफ मकसद है ईरान की सेना की ताकत को कम करना है. अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी ईरान में चल रहे अभियान का मकसद सभी मिलिट्री ऑप्शन खुले रखना है.

अमेरिकी हमलों से ईरान के दक्षिणी खुज़ेस्तान प्रांत में धमाके हुए, जिसमें खबर है कि एक मिसाइल अहवाज़ के बाहरी इलाके में गिरी.

अमेरिकी हमलों पर ईरान ने भी जबरदस्त पलटवार किया. उसने कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें बरसाईं. उसने बहरीन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया.

ईरान के संभावित हमलों से सऊदी अरब में बने अमेरिकी एयर बेस के अलावा उसके सबसे बड़े ऑयल पाइपलाइन टर्मिनल पर मिसाइलें गिरने की आशंका में हाई अलर्ट रहा.

वहीं, ईरानी समाचार एजेंसी IRIB के अनुसार, मेजर जनरल मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक ही सीमित नहीं रहेगा.

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