वाराणसी में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गंगा और वरुणा नदी के किनारे कुल 89.257 किलोमीटर की दो एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी मिली है. दोनों परियोजनाओं की कुल पूंजी लागत 25,445.96 करोड़ रुपये है और इनके जरिए शहर में भीड़ कम करने के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना है.
वाराणसी. यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने गंगा और वरुणा नदी के किनारे दो बड़ी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है. 15 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इन दोनों परियोजनाओं को हरी झंडी दी. इनकी कुल लंबाई 89.257 किलोमीटर और कुल पूंजी लागत 25,445.96 करोड़ रुपये है.
गंगा किनारे बनने वाला कॉरिडोर 46.039 किलोमीटर लंबा और छह लेन का होगा. इसे राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच विकसित किया जाएगा. वहीं वरुणा नदी के किनारे 43.218 किलोमीटर लंबा 6/4 लेन का मुख्य रूप से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ेगा.
गंगा कॉरिडोर पर 14,447 करोड़
गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत 14,447.64 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से विकसित किया जाएगा. परियोजना में छह लेन का एलिवेटेड मुख्य मार्ग, केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल हैं.

इस परियोजना के लिए 6,037.85 करोड़ रुपये की सिविल निर्माण लागत और 541.11 करोड़ रुपये की भूमि अधिग्रहण लागत शामिल है. कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिजाइन किया गया है.
सरकारी अनुमान के अनुसार संबंधित क्षेत्र में औसत यात्रा समय करीब 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह सकता है. वहीं एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक का सफर करीब 50 मिनट से घटकर 25 मिनट होने की उम्मीद है.
वरुणा कॉरिडोर भी मंजूर
वरुणा नदी के किनारे बनने वाली दूसरी परियोजना की लंबाई 43.218 किलोमीटर होगी. यह मुख्य रूप से 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जिसमें मुख्य मार्ग के साथ फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड शामिल होंगे.
इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत 10,998.32 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से विकसित किया जाएगा. इसमें 4,565.33 करोड़ रुपये की सिविल निर्माण लागत और 934.91 करोड़ रुपये की भूमि अधिग्रहण लागत शामिल है.

वरुणा कॉरिडोर से एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा समय करीब 40 मिनट से घटकर 20 मिनट होने का अनुमान है. इसके साथ वाराणसी रिंग रोड, वाराणसी एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर बंदरगाह तक पहुंच बेहतर होगी.
काशी की कनेक्टिविटी मजबूत
दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य वाराणसी शहर में यातायात का दबाव कम करना और तेज, नियंत्रित तथा निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराना है. गंगा कॉरिडोर से एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड, रामनगर और बीएचयू समेत प्रमुख स्थानों के बीच संपर्क मजबूत होगा.
परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप प्रमुख राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों, लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे और रामनगर आईडब्ल्यूएआई बंदरगाह को जोड़ने में भी मदद करेंगी. काशी विश्वनाथ मंदिर, नमो घाट, रामनगर किला, वाराणसी के घाट और बीएचयू जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है.

गंगा कॉरिडोर में 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज और 1.32 किलोमीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज भी प्रस्तावित है. इस पैदल पुल में काशी विश्वनाथ मंदिर तक सुगम पैदल संपर्क के लिए ट्रैवललेटर की सुविधा होगी.
व्यापार और पर्यटन को लाभ
सरकार के अनुसार परियोजनाओं से वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव कम होगा. सड़क सुरक्षा में सुधार के साथ यात्री और माल परिवहन को तेज और अधिक सुगम बनाने में भी मदद मिलेगी.
गंगा कॉरिडोर चंदौली के आर्थिक और सामाजिक केंद्रों के साथ छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ने वाली बहुआयामी कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. इससे लॉजिस्टिक्स दक्षता, पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा मिलने तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

