राकेश चतुर्वेदी, भोपाल/विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित नंदवाना क्षेत्र में 338 साल पुरानी प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। राधा अष्टमी के पावन पर्व पर दोपहर 12.30 बजे भव्य महाआरती के साथ मंदिर के पट खोले गए। पूरे साल में केवल इसी एक दिन श्रद्धालुओँ को राधा रानी के प्रत्यक्ष दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है जिसे देखते हुए मंदिर परिसर में हजारों-लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

औरंगजेब के समय मुगलों से बचाकर वृंदावन से विदिशा लाई गई थी प्रतिमा

मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली और आस्था से भरा हुआ है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, औरंगजेब के शासनकाल में जब आक्रांता हिंदू देव-स्थानों और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर रहे थे तब उनके पूर्वज वृंदावन से राधा रानी की इस पवित्र प्रतिमा को मुगलों से बचाते हुए गुप्त रूप से विदिशा लेकर आए थे। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर इसे स्थापित किया गया और अत्यंत गुप्त तरीके से पूजा अर्चना शुरू की गई। इसी सुरक्षात्मक परंपरा के तहत केवल राधा अष्टमी के दिन सी सर्व-समाज और आम लोगों को दर्शन की अनुमति दी जाने लगी जो परंपरा आज 338 वर्षों से चल रही है।

1 लाख तक श्रद्धालु करते हैं दर्शन

मंदिर की अटूट मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां वर्ष में सिर्फ एक दिन खुलने वाले पटों के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी लगातार 3 वर्षों तक यहां दर्शन करने आ चुके हैं। स्थानीय बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि वे बीते 40 वर्षों से लगातार यहां आकर दर्शन करती आ रही हैं।

दोपहर 12:30 बजे हुई महाआरती, दर्शनों के लिए लगीं लंबी कतारें

राधा अष्टमी के शुभ मुहूर्त पर दोपहर ठीक 12:30 बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खोले गए, पूरा परिसर ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंज उठा। महाआरती के बाद दर्शन प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके लिए तड़के से ही लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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