रायपुर। धान का कटोरा कहलाने वाला छत्तीसगढ़ हमेशा से शांतिप्रिय प्रदेश माना जाता रहा है। यहां के लोग बेहद सहज, सरल और सहनशील माने जाते हैं, लेकिन कोरिया जिले के नागोई गांव की हिंसक घटना ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया कि शांति का टापू माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में ये क्या हो रहा है। इस घटना ने यह सवाल लोगों के मन में ला दिया है कि क्या वाकई हम अपनी शांति को सहेज पा रहे हैं?

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जब कोई आपराधिक घटना घटती है तो पहली प्रतिक्रिया “कानून अपना काम करेगा” और “दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा” होती है। यह ठीक भी है, लेकिन कानून तभी काम कर पाता है जब उसके रास्ते में प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण की दीवार न खड़ी हों। अगर प्रशासनिक लापरवाही और अवैध गतिविधियों को समय पर नहीं रोका जाता और लगातार राजनीतिक छत्रछाया मिल जाती है, तो नतीजा यही होता है। रंजिशें पनपती हैं, वर्चस्व की लड़ाई खून तक पहुंचती है और फिर कई परिवार हमेशा के लिए उजाड़ दिए जाते हैं। नागोई गांव में हुई हिंसा कुछ इसी तरह की बातों को प्रतिबिंबित कर रही है।

एक दिन में नहीं भड़की हिंसा

नागोई गांव से मिली जानकारी के मुताबिक मृतक ठाकुर परिवार और आरोपी त्रिपाठी परिवार के बीच वर्चस्व को लेकर पुराना विवाद था। कोई भी विवाद एक दिन में खून नहीं मांगता। वह पहले शिकायत बनता है, फिर तनाव, फिर धमकी और फिर आखिरी में हिंसा का रूप अख्तियार करता है। इस बीच अगर थाने में दर्ज शिकायत किसी दबाव की वजह से फाइल में दब जाए, अगर रेत खनन जैसी अवैध गतिविधियों पर समय पर कार्रवाई न हो, तो लोग खुद “न्याय” करने निकल पड़ते हैं। नागोई में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही थी कि वह चिंगारी को आग न बनने दे। प्रशासन की इसी लापरवाही ने तीन लोगों की जान ले ली।

क्या राजनीतिक संरक्षण अपराधियों का सबसे बड़ा कवच?

किसी भी अवैध काम को सबसे ज्यादा ताकत तब मिलती है जब उसे लगता है कि “ऊपर से सपोर्ट है”। चाहे वह अवैध शराब हो या फिर अवैध उत्खनन हो। जब सत्ता, पद या प्रभाव का डर कानून पर हावी हो जाए, तो पुलिस की कलम कांपने लगती है। नतीजा यह होता है कि पीड़ित बेबस हो जाते हैं और अपराधी बेखौफ। छत्तीसगढ़ की पहचान आपसी भाईचारे, शांतिप्रियता और समन्वयवादी संस्कृति की है। लेकिन शांति कोई स्थायी चीज नहीं है। उसे रोज संवाद से, रोज न्याय से, रोज जवाबदेही से सींचना पड़ता है और राजनीति को तय करना होगा कि वह वोट के लिए तनाव खरीदेगी या शांति बेचेगी।

नागोई की घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं

नागोई की घटना एक खतरनाक चेतावनी है। यह सिर्फ एक जिले की समस्या नहीं है। जहां भी प्रशासनिक लापरवाही, अवैध गतिविधियों और राजनीतिक संरक्षण का त्रिकोण बनता है, वहां आखिरकार शांति टूटती ही है।

अब जवाबदेही तय करने का समय

इसलिए अब वक्त है अवैध गतिविधियों पर तुरंत लगाम लगाने का, जिसमें संरक्षण की गुंजाइश शून्य हो। अगर किसी विवाद पर समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो। निलंबन और जांच सिर्फ घटना के बाद नहीं, लापरवाही के समय भी हो।

छत्तीसगढ़ की शांति ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी

छत्तीसगढ़ की शांति हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। उसे हम लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ा सकते। कानून का राज होगा तभी विकास का रास्ता खुलेगा। अंत में बस यही – पीड़ित परिवार को न्याय मिले, दोषियों को कठोर सजा मिले और प्रदेश को वह शांति वापस मिले जिसके लिए छत्तीसगढ़ जाना जाता है, क्योंकि डर में जीता हुआ समाज कभी आगे नहीं बढ़ता।

लेखक- मनोज सिंह बघेल
एडोटोरियल डायरेक्टर
NEWS 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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