जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन को जारी रखने में कई वॉलंटियर पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अलावा ये लोग भी आंदोलन की व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि इन वॉलंटियर्स में लखनऊ का एक इलेक्ट्रीशियन, दिल्ली का रेहड़ी-पटरी विक्रेता, मुंबई का एक डॉक्टर, नर्सिंग प्रोफेशनल, UPSC की तैयारी करने वाले छात्र और PhD स्कॉलर शामिल हैं। प्रदर्शन में शामिल लोग जहां सार्वजनिक रूप से नजर आते हैं, वहीं ये वॉलंटियर जनता से मिलने वाले दान, खाने-पीने की व्यवस्था और अन्य जरूरतों को पूरा करने का काम कर रहे हैं। हालांकि, हाल में इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे, जब पुलिस ने कथित तौर पर प्रदर्शन स्थल पर सामान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की जांच शुरू की और उनके आने-जाने पर रोक लगाने की कोशिश की।
15-20 लोगों का अनौपचारिक नेटवर्क सक्रिय
शुक्रवार को प्रदर्शन स्थल पर खाने के लिए लंबी कतारें नजर आईं। राजमा-चावल की प्लेटों के लिए लोग लाइन में खड़े थे, जबकि पानी की बोतलें, टिफिन और खाने के बड़े बर्तन अस्थायी कैंप के एक हिस्से में रखे गए थे। प्रदर्शन स्थल पर एक छोटी सी मेज को अस्थायी डिस्पेंसरी के रूप में भी तैयार किया गया है। यहां सिरदर्द, बुखार और पेट से जुड़ी सामान्य समस्याओं की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन व्यवस्थाओं को किसी बड़े संगठन के बजाय करीब 15-20 वॉलंटियर्स का एक अनौपचारिक नेटवर्क संभाल रहा है। बताया जा रहा है कि ये लोग 20 जून को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही एक-दूसरे के संपर्क में आए और अब मिलकर भोजन, पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था कर रहे हैं।
मार्शल वॉलंटियर संभाल रहे अहम जिम्मेदारी
सफेद टी-शर्ट पहने ये वॉलंटियर, जिन पर ‘मार्शल वॉलंटियर’ लिखा है, प्रदर्शन स्थल पर खाना और पानी बांटने के काम में जुटे हैं। ये वॉलंटियर्स जरूरत के मुताबिक प्रदर्शनकारियों से भी सहयोग लेते हैं और खाने-पीने समेत अन्य व्यवस्थाओं को बनाए रखने में मदद करते हैं। गाजीपुर के वकील मोहम्मद जुनैद, जो वॉलंटियर्स के काम का समन्वय करते हैं, ने बताया कि CJP के समर्थन के लिए कोई औपचारिक संगठन काम नहीं कर रहा है। उनके मुताबिक, जो भी व्यक्ति मदद करना चाहता है, वह अपनी इच्छा से आगे आता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पेशों और पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों के बीच एक तरह का सहयोग और भाईचारा बन गया है। वॉलंटियर्स शिफ्ट में काम करते हैं, ताकि खाना, पानी और अन्य जरूरी चीजों की व्यवस्था के लिए हर समय कोई न कोई मौजूद रहे। प्रदर्शन स्थल पर ये वॉलंटियर भोजन वितरण, पानी की व्यवस्था और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
MP के किसान सूर्य प्रताप भी प्रोटेस्ट में शामिल
जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में मदद करने वाले वॉलंटियर्स में मध्य प्रदेश के किसान सूर्य प्रताप सिंह भी शामिल हैं। वर्तमान में वह नोएडा में रहते हैं और प्रदर्शन स्थल पर व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं। सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि वह सुबह से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहते हैं और दोपहर तक घर लौट जाते हैं। इसके बाद कोई दूसरा वॉलंटियर जिम्मेदारी संभाल लेता है। उन्होंने कहा कि अगले दिन वह फिर आकर अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अपने अनुभवों के कारण वह प्रदर्शन से जुड़े लोगों की परेशानियों को समझते हैं। सूर्य प्रताप के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2009 में मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर रद्द हो गया था। उन्होंने आगे बताया कि उनके दो चचेरे भाइयों ने NEET परीक्षा पास की थी, लेकिन उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका और यह मामला अभी भी अदालत में चल रहा है। सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि अब वह परिवार की जमीन पर खेती करते हैं और स्कूल जाने वाले अपने दो बच्चों की देखभाल करते हैं। उनका कहना है कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवार किन परिस्थितियों से गुजरते हैं, इसका उन्हें व्यक्तिगत अनुभव है।
आम लोगों का सहयोग, घर का खाना और जरूरी सामान पहुंचा रहे
जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में व्यवस्थाओं को संभाल रहे वॉलंटियर्स का कहना है कि खाने-पीने की ज्यादातर व्यवस्था आम लोगों की मदद से हो रही है। वॉलंटियर्स के मुताबिक, कई लोग अपने घर से बना खाना लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचते हैं, जबकि कुछ लोग डिलीवरी ऐप के जरिए पानी, बिस्किट, जूस और अन्य जरूरी सामान भेजते हैं। वॉलंटियर्स ने बताया कि कई लोग आर्थिक मदद करना चाहते हैं, लेकिन वे आमतौर पर कैश डोनेशन लेने से इनकार करते हैं। इसके बजाय लोगों से सीधे जरूरत का सामान भेजने के लिए कहा जाता है, ताकि व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे। वॉलंटियर्स के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों में कई ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी पहचान के मदद कर जाते हैं। एक मौके पर एक व्यक्ति चुपचाप करीब 50 किलो वेज पुलाव छोड़कर चला गया, जिसे बाद में प्रदर्शनकारियों के बीच बांटा गया।
बाहर से कोई फंडिंग नहीं, आपस में पैसे जुटाकर कर रहे व्यवस्था
जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में व्यवस्थाएं संभाल रहे वॉलंटियर्स का कहना है कि खाने-पीने और अन्य जरूरतों के लिए बाहर से कोई फंडिंग नहीं मिल रही है। एक वॉलंटियर ने बताया कि अगर किसी सामान की तत्काल जरूरत होती है तो सभी लोग मिलकर पैसे जुटाते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार करीब 200-300 रुपये तक योगदान देता है और इसी से जरूरी चीजों का इंतजाम किया जाता है। वॉलंटियर के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर मदद करने वालों में ऐसे लंगर ग्रुप भी शामिल हैं, जो आमतौर पर दिल्ली के अस्पतालों के बाहर लोगों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। ये समूह भी जरूरत के अनुसार खाने की व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने इस काम के लिए अपने नियमित काम-धंधे से समय निकाल लिया है और वे लगातार प्रदर्शन स्थल पर व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। वॉलंटियर्स का कहना है कि भोजन, पानी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था व्यक्तिगत सहयोग और आपसी भागीदारी से चल रही है।
कई वॉलंटियर्स अपने निजी काम छोड़कर व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। इनमें नोएडा के छोटे कारोबारी ब्रजेश पांडे भी शामिल हैं। ब्रजेश पांडे, जो नोएडा में एक छोटा ठेला चलाते हैं और खुद को गौ रक्षक बताते हैं, ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर रहने के लिए अपना काम फिलहाल रोक दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में शामिल रहने के कारण उन्हें हर दिन करीब 3,000 रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन वह सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे लोगों का समर्थन करना चाहते हैं। ब्रजेश पांडे के मुताबिक, वह प्रदर्शन स्थल पर ही रहते हैं और पूरा दिन यहीं बिताते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी तरफ से व्यवस्था संभालने और प्रदर्शनकारियों की मदद करने में योगदान दे रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन में अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग वॉलंटियर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें लखनऊ के एक इलेक्ट्रिशियन भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और डेढ़ साल की बेटी उनके होमटाउन में हैं, लेकिन परिवार को यह जानकारी नहीं है कि वह 19 जून से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं। इलेक्ट्रिशियन ने कहा कि अगर परिवार को इसके बारे में पता चलेगा तो उन्हें केवल चिंता होगी, इसलिए उन्होंने उन्हें जानकारी नहीं दी। वह प्रदर्शन स्थल पर रहकर अन्य वॉलंटियर्स के साथ व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से आए कई लोग अपने निजी काम और जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर यहां मदद कर रहे हैं।
DU के PHD स्कॉलर भी
उत्तर प्रदेश की एक PhD स्कॉलर भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि वह हर सुबह करीब 3 घंटे पढ़ाई करती हैं और इसके बाद वजीराबाद से जंतर-मंतर तक रैपिडो के जरिए पहुंचकर प्रदर्शन स्थल पर पानी बांटने में मदद करती हैं। PhD स्कॉलर ने बताया कि उनके माता-पिता उन्हें प्रदर्शन स्थल पर जाने से मना करते हैं, क्योंकि उन्हें उनकी सुरक्षा की चिंता रहती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और ऐसे मुद्दों पर किसी न किसी को सवाल उठाने की जरूरत है।
जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में वॉलंटियर्स की ओर से एक अस्थायी डिस्पेंसरी भी चलाई जा रही है, जहां आम लोगों को प्राथमिक इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इस डिस्पेंसरी को मुंबई के डॉक्टर सुरेश अभिमान गवई संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी सामान्यतः आरामदायक है और उन्हें यहां रहने की कोई मजबूरी नहीं है, लेकिन जब सिस्टम युवाओं को निराश करता है तो चुप रहना आसान नहीं होता। डॉक्टर गवई ने कहा कि ऐसे हालात में लोगों की मदद के लिए आगे आना जरूरी लगता है, इसलिए वे अस्थायी डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कई वॉलंटियर्स ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि हाल ही में पुलिस की चेकिंग और निगरानी की वजह से कई लोग सामान लाने-ले जाने से कतराने लगे हैं, जिससे व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में वॉलंटियर्स ने बताई दिक्कतें
जंतर मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन में वॉलंटियर्स और आयोजकों ने व्यवस्थाओं से जुड़ी कुछ मुश्किलों का जिक्र किया है। एक वॉलंटियर ने बताया कि हाल ही में खाना ले जा रहे एक ऑटो को पहचान जांच के लिए रोक दिया गया, जिससे ड्राइवर घबरा गया और बिना सामान उतारे ही वहां से जाने लगा। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं उन लोगों का हौसला कम करती हैं जो केवल मदद करने के उद्देश्य से आते हैं। प्रदर्शन स्थल पर QR कोड वाले कई पोस्टर भी लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करने पर एक ऑनलाइन फॉर्म खुलता है। इस फॉर्म के जरिए लोग ‘CJP टीम’ से जुड़ने का विकल्प चुन सकते हैं। फॉर्म में समर्थकों से उनकी बुनियादी जानकारी मांगी जाती है, जैसे कि वे किस राज्य से हैं और वे किस तरह से आंदोलन या व्यवस्था में योगदान दे सकते हैं। वॉलंटियर्स का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था लोगों की भागीदारी और सहयोग से चल रही है, लेकिन पहचान जांच और सुरक्षा प्रक्रियाओं के कारण कभी-कभी सामान और मदद पहुंचाने में कठिनाई भी आती है।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने क्या कहा
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि पुलिस टेंट, स्टेज, पानी और खाने जैसी व्यवस्थाओं में सहयोग करने वाले लोगों पर नजर रख रही है। रांका के अनुसार, वकील जुनैद जैसे लोग खाने की व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं, जबकि कुछ दिनों पहले प्रदर्शनकारियों के लिए गद्दों की भी व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पूरा आंदोलन आम लोगों के सहयोग से चल रहा है, जहां अलग-अलग लोग अपनी क्षमता के अनुसार मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से संगठन से जुड़े नेता लगभग 24 घंटे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं। उनके अनुसार, वे प्रदर्शनकारियों के साथ ही रहते हैं और सभी व्यवस्थाओं की निगरानी भी करते हैं।
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