भिवानी जिले के ऐतिहासिक गांव बामला-1 में भीषण गर्मी के बीच पेयजल सप्लाई पूरी तरह ठप होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ वेटरन संगठन के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल ने रोहतक रोड जाम करने की कड़ी चेतावनी दी है।

अजय सैनी, भिवानी। एक तरफ जहां आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, वहीं भिवानी जिला का ऐतिहासिक गांव बामला-1 इन दिनों पानी की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। गांव में पेयजल सप्लाई पूरी तरह ठप्प हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। हद तो यह है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सोए हुए प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इस गंभीर मुद्दे पर वेटरन संगठन भिवानी के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ तीखा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि Water Crisis in Bamla Bhiwani की जमीनी हकीकत यह है कि यह गांव जिले के बड़े गांवों में शुमार है, लेकिन यहां पर पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है।

कागजों पर टैंक और धरातल पर धूल

उन्होंने कहा कि गांव बामला-1 में पहला जलघर पूरी तरह से सूखा पड़ा है, जिसमें धूल उड़ रही है। वहीं दूसरा जलघर जो है, उसमें केवल नाममात्र का पानी बचा है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। यही नहीं, पानी के सुचारू वितरण के लिए बनाए गए छोटे-छोटे सब-डिवीजनल टैंक खाली पड़े हैं। जो थोड़े-बहुत मुख्य डग या टैंक हैं, वे जगह-जगह से पूरी तरह लीकेज हैं। यानी अगर थोड़ा-बहुत पानी आता भी है, तो वह सिस्टम की नाकामी के कारण पूरी तरह बर्बाद हो जाता है। सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने कहा कि गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत के कारण ग्रामीण अब दोहरे संकट से जूझ रहे हैं। जहां जमीन का पानी मीठा है, वहां लोग सबमर्सिबल के सहारे जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं।

महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर

लेकिन गांव के जिन हिस्सों में जमीन का पानी खारा है, वहां हालात भयावह हो चुके हैं। ग्रामीणों के पास निजी टैंकरों से पानी मंगवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। एक-एक टैंकर के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है, जो गरीब ग्रामीणों और किसानों की जेब पर सीधा डाका है। सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल ने कहा कि यह समस्या कोई एक-दो सप्ताह की नहीं है, बल्कि पिछले कई दिनों से गांव बामला-1 के लोग इस नरकीय स्थिति को झेल रहे हैं। जब ग्रामीण जलघर के कर्मचारियों के पास समाधान की गुहार लेकर जाते हैं, तो उनका एक ही रटा-रटाया जवाब होता है कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है, ऊपर से पानी नहीं आ रहा। सबसे हैरान और परेशान करने वाली बात तो यह है कि पिछले दिनों नहर में पानी आया था।

उग्र आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी

नियमतः विभाग को मुस्तैदी दिखाकर जलघर के टैंकों को पूरा भरना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते नहर आने के बावजूद टैंक खाली रह गए। उन्होंने कहा कि गांव बामला-1 के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भरी गर्मी में पशु प्यासे मर रहे हैं, घर के काम ठप हैं और अफसर एसी कमरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं। वेटरन संगठन के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल और बामला के ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जलघर के टैंकों को भरकर गांव में पेयजल की सुचारू सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो ग्रामीण और वेटरन संगठन मिलकर जनस्वास्थ्य विभाग के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलेंगे तथा गांव बामला में भिवानी-रोहतक रोड़ पर जाम लगाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।