नीरज काकोटिया, बालाघाट। मध्यप्रदेश को ‘वाइल्डलाइफ लीडर’ बनाने की दिशा में वन विभाग ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार रेंज में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम का द्वितीय चरण शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान चार और जंगली भैंसों को विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़े में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया।

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मुख्यमंत्री की पहल पर 150 साल बाद वापसी

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के जंगलों से जंगली भैंसा प्रजाति लगभग 150 वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुकी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इनकी पुनर्स्थापना के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसी योजना के तहत 28 अप्रैल 2026 को प्रथम चरण में मुख्यमंत्री ने खुद चार भैंसों को सुपखार के बाड़े में मुक्त किया था।

कुनबे में बढ़ी मादाओं की संख्या

द्वितीय चरण के सफल समापन के बाद कान्हा नेशनल पार्क में जंगली भैंसों की कुल संख्या अब 8 हो गई है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साह की बात यह है कि इन 8 भैंसों में 2 नर और 6 मादा शामिल हैं जो भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुए निर्मुक्त

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रधान मुख्य वन संरक्षक समिता राजोरा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल. कृष्णमूर्ति, क्षेत्र संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक सहित स्थानीय वन अमला मौजूद रहा।

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अगला लक्ष्य, 3 साल में 50 भैंसे

वन विभाग ने इस परियोजना के तहत अगले तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल जैव विविधता मजबूत होगी, बल्कि कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए एक और बड़ा आकर्षण बनेगा।

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