परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब अपने संगठनात्मक विस्तार और भविष्य की रणनीति पर फोकस कर रही है। इसी सिलसिले में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke ), प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Das), वैष्णवी गौर समेत कई प्रमुख सदस्य महाराष्ट्र में आज से शुरू हो रही 2 दिवसीय अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में संगठन की भविष्य की कार्ययोजना, जनसंपर्क अभियान, विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर भूमिका और देशभर में समर्थकों के नेटवर्क को मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। हाल के छात्र आंदोलनों से मिले अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति भी तय की जाएगी। मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान CJP नेतृत्व ने कहा कि लोगों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए केवल पारंपरिक राजनीतिक विकल्प तैयार करना पर्याप्त नहीं है।

युवाओं के नेतृत्व वाले इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन के प्रमुख सदस्य महाराष्ट्र में दो दिवसीय बैठक कर रहे हैं, जहां संगठन की भविष्य की दिशा और विस्तार पर मंथन किया जाएगा। CJP ने पिछले महीने नीट पेपर लीक के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन ने देशभर में छात्रों और युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।

अब यह सवाल उठ रहा है कि ‘जेन जी’ (Gen Z) के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी CJP आगे किस दिशा में बढ़ेगी। संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आंदोलन की सफलता के बाद लगातार उनसे पूछा जा रहा है कि इसका अगला चरण क्या होगा। सौरव दास ने कहा, “हम सभी इसी सवाल पर रणनीति बनाने के लिए एकत्र हुए हैं। हम चर्चा करेंगे कि इस आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाया जाए और इसे जमीनी स्तर तक कैसे पहुंचाया जाए।” उन्होंने संकेत दिया कि संगठन केवल विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि युवाओं और आम लोगों के मुद्दों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की दिशा में भी काम करेगा।

6 अगस्त को भविष्य की रणनीति का खुलासा करेगी CJP

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन की दो दिवसीय रणनीतिक बैठक में भविष्य की दिशा पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि 6 अगस्त को जब संगठन के पास एक ठोस योजना तैयार हो जाएगी, तब उसकी भविष्य की रणनीति सार्वजनिक की जाएगी। सौरव दास ने कहा, “सीजेपी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। देश में पहले से ही कई राजनीतिक दल मौजूद हैं। लोगों की समस्याओं का समाधान किसी नई राजनीतिक पार्टी के गठन में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जागरूकता पैदा करने में है और CJP इसी दिशा में काम कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य देशभर में जमीनी स्तर का नेटवर्क तैयार करना है। इसके तहत हर जिले में कार्यकर्ताओं के साथ एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।  CJP का आंदोलन जवाबदेही और जनभागीदारी पर आधारित है। “हम जिन मुद्दों को उठाना चाहते हैं, वे मुख्य रूप से युवाओं पर केंद्रित होंगे। हमारा उद्देश्य व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना और युवाओं की आवाज को मजबूत करना है।”

CJP की कोर कमेटी की 2 दिवसीय बैठक शुरू

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि बैठक में कोर टीम के सदस्य, आंदोलन के आयोजन और प्रबंधन में शामिल प्रमुख सहयोगी तथा संगठन के अन्य सक्रिय सदस्य हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन के सभी प्रमुख सदस्य इस बैठक में मौजूद रहेंगे और आगे की दिशा तय करने पर विचार-विमर्श करेंगे। दीपके ने कहा कि CJP युवाओं की आवाज को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। इसके लिए संगठन आज की युवा पीढ़ी से यह जानने की कोशिश करेगा कि वे किन मुद्दों को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं और भविष्य में किन विषयों को प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए।

अभिजीत दीपके ने कहा कि बैठक का उद्देश्य कॉकरोच जनता पार्टी के लिए एक स्पष्ट एजेंडा तैयार करना और इस बात पर चर्चा करना है कि इस सामाजिक आंदोलन को देशभर में कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संगठन फिलहाल खुद को एक सामाजिक आंदोलन के रूप में देखता है और उसका फोकस जनजागरूकता तथा जवाबदेही के मुद्दों पर रहेगा। इस समय CJP की राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि देश में पहले से कई राजनीतिक दल मौजूद हैं, जबकि जरूरत लोगों को जागरूक करने और युवाओं को सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की है।

बच्चों को डराया-धमकाया न जाए

CJP नेता वैष्णवी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और बच्चों तथा युवाओं को डराने-धमकाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। वैष्णवी ने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को नागरिकों पर एकतरफा फैसले थोपने के बजाय सार्थक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बातचीत के बजाय निर्देश देने की राजनीति करते हैं।

वैष्णवी ने कहा, “हमारी उम्मीद है कि हुक्म चलाने के बजाय बातचीत की जाए। बच्चों को डराया-धमकाया न जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो हम अपने युवा आंदोलन पर काम जारी रखेंगे और युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों ने यह दिखाया है कि युवा वर्ग अपने मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक और मुखर हो रहा है। ऐसे में उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

वहीं, CJP नेता रत्ना सिंह ने कहा कि जन-आंदोलनों का प्रभाव केवल प्रदर्शन स्थलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके व्यापक राजनीतिक और सामाजिक परिणाम भी सामने आते हैं। उनके अनुसार, हालिया विरोध प्रदर्शनों का असर बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों और अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंचा है। रत्ना सिंह ने कहा कि जब बड़ी संख्या में युवा किसी मुद्दे को लेकर एकजुट होते हैं, तो उसका प्रभाव राजनीतिक विमर्श और नीतिगत चर्चाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक भागीदारी का महत्वपूर्ण संकेत बताया।

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