Business Desk – 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। 75,000 रुपए या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक सीमित रहेगा।

यह चार्ज आम ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट यानी दुकानदार के हिस्से में आएगा। वहीं पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेगा। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन पर नए MDR का असर नहीं पड़ेगा।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बड़े भुगतान पर MDR की वजह से कुछ मर्चेंट या ग्राहक कैश का विकल्प चुनते हैं, तो क्या देश का मौजूदा कैश इंफ्रास्ट्रक्चर उस अतिरिक्त मांग को संभाल पाएगा? RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि डिजिटल पेमेंट के मुकाबले ATM नेटवर्क की बढ़ोतरी काफी धीमी रही है।
कैश बढ़ा, ATM नेटवर्क की रफ्तार धीमी
28 मार्च 2025 तक देश में करेंसी इन सर्कुलेशन करीब 37.20 लाख करोड़ रुपए थी। मार्च 2025 में यह एक साल पहले के मुकाबले करीब 6.5% ज्यादा थी।
इसके मुकाबले मार्च 2018 से मार्च 2025 के बीच ATM की संख्या करीब 2.3 लाख से बढ़कर 2.6 लाख हुई। यानी इसमें करीब 13% की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी ओर इसी अवधि में UPI QR की संख्या करीब 4.1 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गई। यानी इसमें 1,500% से ज्यादा की छलांग आई।
हालांकि, सिर्फ ATM की संख्या को देखकर कैश इंफ्रास्ट्रक्चर को कमजोर नहीं कहा जा सकता। कैश निकालने के लिए ATM के अलावा माइक्रो ATM, बैंक ब्रांच और दूसरे चैनल भी मौजूद हैं।
ATM से अभी भी बड़ी रकम निकलती है
RBI के पेमेंट सिस्टम इंडिकेटर्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में ATM से करीब 66.44 करोड़ कैश विड्रॉल ट्रांजैक्शन हुए। इनकी कुल वैल्यू करीब 32.59 लाख करोड़ रुपए थी।
हालांकि, हाल के आंकड़ों में ATM से कैश निकालने की गतिविधि में गिरावट दिखी है। फरवरी 2024 में ATM से कैश विड्रॉल की वैल्यू करीब 2.57 लाख करोड़ रुपए थी, जो फरवरी 2025 में घटकर करीब 2.36 लाख करोड़ रुपए रह गई। यानी एक साल में करीब 8.4% की गिरावट।
इसी दौरान कैश विड्रॉल ट्रांजैक्शन 5,172 लाख से घटकर 4,498 लाख रह गए। यानी ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 13% कम हुई।
माइक्रो ATM से बढ़ा कैश निकासी का इस्तेमाल
ATM के अलावा माइक्रो ATM भी कैश निकालने का अहम माध्यम हैं। मार्च 2024 में इनकी संख्या 17.55 लाख थी, जो फरवरी 2025 तक घटकर 14.68 लाख रह गई। यानी नेटवर्क में करीब 16.4% की कमी आई।
इसके बावजूद माइक्रो ATM से होने वाले कैश विड्रॉल ट्रांजैक्शन बढ़े। फरवरी 2024 में करीब 812 लाख ट्रांजैक्शन हुए थे, जो फरवरी 2025 में बढ़कर करीब 922 लाख हो गए। यानी करीब 13.5% की बढ़ोतरी।
इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू भी 21,543 करोड़ रुपए से बढ़कर 23,605 करोड़ रुपए हो गई। इसमें करीब 9.6% की वृद्धि हुई।
65 करोड़ UPI QR के मुकाबले 2.58 लाख ATM-CRM
फरवरी 2025 में देश में ATM और कैश रिसाइक्लिंग मशीन यानी CRM की संख्या करीब 2.58 लाख थी। इसके मुकाबले UPI QR की संख्या करीब 64.97 करोड़ थी।
मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच UPI QR की संख्या 34.34 करोड़ से बढ़कर 64.97 करोड़ हो गई। यानी करीब 89% की बढ़ोतरी।
वहीं इसी अवधि में ATM और CRM की संख्या करीब 2.58 लाख पर बनी रही। यानी इसमें लगभग कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
अगर कैश की मांग बढ़ी तो क्या होगा?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि MDR लागू होने के बाद लोग बड़े UPI भुगतान छोड़कर कैश का इस्तेमाल बढ़ा देंगे। सरकार ने भी कहा है कि MDR का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता।
फिर भी अगर किसी वजह से बड़े भुगतान में कैश की मांग बढ़ती है, तो भारत के पास सिर्फ ATM ही विकल्प नहीं हैं। माइक्रो ATM, बैंक ब्रांच और दूसरे कैश चैनल भी मौजूद हैं।
आंकड़ों के मुताबिक देश में करेंसी इन सर्कुलेशन 37 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, जबकि UPI का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद तेजी से बढ़ा है। दूसरी ओर ATM नेटवर्क लगभग स्थिर रहा है और हालिया आंकड़ों में ATM से कैश निकासी भी घटी है।
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि MDR के बाद लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि अगर कैश की मांग बढ़ती है, तो वह कैश किस माध्यम से निकलेगा और क्या मौजूदा कैश नेटवर्क अतिरिक्त मांग को आसानी से संभाल पाएगा?



