पवन राय, मंडला। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्वसहायता समूह की बहनें परंपरा और स्वदेशी सोच का अनूठा उदाहरण पेश कर रही हैं। नैनपुर विकासखंड की ‘स्वदेशी स्वसहायता समूह’ की दीदियां गाय के गोबर, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर आकर्षक वैदिक राखियां तैयार कर रही हैं। प्लास्टिक की राखियों के दौर में शुद्धता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली इन वैदिक राखियों की मांग अब मंडला से निकलकर भोपाल, दिल्ली और महाराष्ट्र तक पहुंच गई है।
सांचे में ढालकर ऐसे तैयार होती हैं वैदिक राखियां
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक के अनुसार, रक्षाबंधन की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए इन प्राकृतिक राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध गाय के गोबर को सुखाकर उसका पाउडर तैयार किया जाता है। इसके बाद इस पाउडर में मिट्टी और प्रीमिक्स मिलाकर सांचों में ढाला जाता है। सांचे से निकलने और सूखने के बाद मोती व अन्य सजावटी सामग्रियों से इन्हें बेहद सुंदर और आकर्षक रूप दिया जाता है।
प्रशासन और सोशल मीडिया से मिल रहा बड़ा बाजार
इन वैदिक राखियों की बिक्री और विपणन (मार्केटिंग) में जिला प्रशासन भी भरपूर सहयोग कर रहा है। स्थानीय बाजारों के अलावा इन राखियों को भोपाल में आयोजित होने वाले ‘भोपाल हाट’ में भी बिक्री के लिए भेजा जा रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी खुद भी उत्साह के साथ इन राखियों की खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन ऑर्डर लेकर भी देश के अलग-अलग राज्यों में राखियां बेची जा रही हैं।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की बनीं मिसाल
प्लास्टिक और चाइनीज राखियों के विकल्प के रूप में उभर रहीं ये वैदिक राखियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया भी बन चुकी हैं। शासन-प्रशासन के प्रोत्साहन से समूह की दीदियों की यह अभिनव पहल अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


