यमुनानगर। मानसून के आगमन से पहले यमुनानगर जिला प्रशासन बाढ़ और जलभराव की संभावित समस्याओं से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिले के महत्वपूर्ण चौटांग नाले की सफाई और मजबूतीकरण का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद बरसात के दौरान हजारों एकड़ क्षेत्र को जलभराव और बाढ़ के खतरे से राहत मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, चौटांग नाले में बड़े पैमाने पर डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) का काम किया जा रहा है। भारी मशीनों की मदद से नाले में वर्षों से जमा गाद हटाई जा रही है, ताकि बारिश का पानी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके और जल निकासी व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
यह कार्य अंबाला-जगाधरी रोड के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में किया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत 2 करोड़ 29 लाख 61 हजार रुपये बताई गई है, जबकि इसके लिए 92 लाख 5 हजार रुपये की एग्रीमेंट कॉस्ट निर्धारित की गई है। नाले में यह कार्य आरडी-3000 से आरडी-48000 तक किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना का उद्देश्य चौटांग नाले के जलग्रहण क्षेत्र के करीब 87 वर्ग मील इलाके से वर्षा जल की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है। हर साल मानसून के दौरान आसपास के कई गांवों को जलभराव का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य 19 मई 2026 को गांव कान्हडी खुर्द से शुरू किया गया था। फिलहाल सफाई और मजबूतीकरण का काम गांव सुखदासपुर के पास आरडी-24000 तक पहुंच चुका है। मौके पर मशीनें और कर्मचारी लगातार काम में जुटे हुए हैं ताकि परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
इस कार्य की निगरानी कार्यकारी अभियंता सुरिंदर कुमार और उपमंडल अधिकारी बलविंदर कुमार द्वारा की जा रही है, जबकि निर्माण कार्य ठेकेदार सुरेंद्र दलाल की एजेंसी के माध्यम से किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कार्य की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

सरस्वती नगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली इस परियोजना पर क्षेत्र के सांसद वरुण चौधरी और विधायक रेनू बाला भी नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि नाले का काम पूरा होने के बाद इस बार मानसून में उन्हें बाढ़ और जलभराव की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है, तो मानसून के दौरान दर्जनों गांवों को बड़ी राहत मिल सकती है और बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
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