मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई और स्थलीय सर्वे कर पीड़ितों से मुलाकात की. उन्होंने घर नष्ट होने वाले लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान या जमीन का पट्टा देने की घोषणा की.
चित्रकूट. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया. मंदाकिनी नदी में आए उफान से हुई तबाही का हवाई सर्वे करने के बाद मुख्यमंत्री रामघाट पहुंचे और वहां नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया.
मुख्यमंत्री ने प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी. उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित लोग अकेले नहीं हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है.

रामघाट पर नुकसान का जायजा
रामघाट के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त संत तुलसीदास की प्रतिमा के पास भी पहुंचे. प्रतिमा की स्थिति देखकर उन्होंने चिंता जताई और अधिकारियों से इसके जीर्णोद्धार तथा सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में तत्काल जानकारी ली.
रामघाट पर सुरक्षा के मद्देनजर जल पुलिस, मोटरबोट और गोताखोरों की विशेष तैनाती की गई थी. बाढ़ के बाद भी मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेज होने के कारण पुलिस प्रशासन नावों के जरिए पूरे घाट क्षेत्र पर नजर रख रहा है.
किसी भी अनहोनी की स्थिति से निपटने के लिए मोटरबोट और जाल की भी व्यवस्था की गई है.
राहत सामग्री और बच्चों को टॉफियां
हवाई सर्वे और रामघाट के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री रामायण मेला पहुंचे. उनके साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, प्रभारी जिला मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री की किट वितरित की. इस दौरान उन्होंने बच्चों को दुलारते हुए चॉकलेट और टॉफियां भी बांटीं.
बाढ़ आते ही शुरू कराया बचाव कार्य
जनसभा को सियाराम के जयघोष के साथ संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने 12 वर्ष रहकर रामराज्य की परिकल्पना को साकार किया था, वहां आपदा की इस घड़ी में पूरी सरकार लोगों के साथ खड़ी है.
उन्होंने कहा कि जिस दिन बाढ़ आई, उस समय वह बलिया में थे. इसके बावजूद उन्होंने तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों को अलर्ट किया और बचाव कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए.
मकान और जमीन का ऐलान
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बाढ़ में जिन लोगों के घर बह गए हैं या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया मकान या जमीन का पट्टा दिया जाएगा.
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले भी चित्रकूट में बाढ़ आती थी, लेकिन उस समय की सरकारें इस पर संज्ञान नहीं लेती थीं और राहत का सारा पैसा हजम कर जाती थीं.

36 गांव हुए प्रभावित
मंदाकिनी नदी के उफान से चित्रकूट जनपद के 36 गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के कारण सैकड़ों कच्चे और पक्के मकान ढह गए हैं, जबकि किसानों की खरीफ फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं.
तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री रामायण प्रेक्षागृह में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री की किट वितरित करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे.



