सतीश सिंह, लखनऊ. बीते दिनों प्रदेश में छापेमारी के दौरान नकली व अधोमानक और कागजों पर चल रहे कारोबार का मामला सामने आने के बाद नकली और मिलावटी दवाओं की बिक्री पर योगी सरकार ने शिकंजा कस दिया है. अब प्रदेश में मरीजों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाने के लिए औषधि लाइसेंस जारी करने से लेकर भंडारण, बिलिंग और पूरी सप्लाई चेन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी.

सोमवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी एसओपी के मुताबिक डमी व्यक्तियों के नाम पर लाइसेंस, फर्जी बिलिंग, स्टॉक में हेराफेरी और काउंटरफीट दवा नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. वहीं गंभीर मामलों में कार्रवाई केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एनडीपीएस अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत भी एफआईआर दर्ज की जाएगी.

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एसओपी में कहा गया है कि नए थोक औषधि लाइसेंस के लिए आवेदक और फर्म की पृष्ठभूमि का गहन सत्यापन अनिवार्य होगा. पहले अवैध कारोबार में शामिल रहे व्यक्तियों को परिवार के सदस्यों या डमी व्यक्तियों के नाम पर नया लाइसेंस नही दिया जाएगा. जबकि आवासीय क्षेत्रों में स्थित प्रतिष्ठानों को औषधि विक्रय लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे. साथ ही भौतिक निरीक्षण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाइसेंस के लिए बताए गए स्थान का वास्तविक उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए ही हो रहा है.

निरीक्षण के दौरान गलत पाए जाने पर होगी कार्रवाई

एसओपी के अनुसार निरीक्षण के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि दुकान वास्तविक लाइसेंसधारी चला रहा है या नहीं. बैंक खाता, जीएसटी पंजीकरण और अन्य दस्तावेज लाइसेंसधारी के नाम पर होने चाहिए. लाइसेंस किसी के नाम पर लेकर कारोबार दूसरे व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाने की पुष्टि पर लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और अभियोजन की कार्रवाई होगी. बेसमेंट, आवासीय मकान या किराए के कमरों में बिना लाइसेंस स्टॉक मिलने पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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एसओपी में कहा गया है कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक्स, कैंसर दवाएं और पेन किलर जैसी फास्ट मूविंग व हाई वैल्यू दवाओं के लेजर स्टॉक और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाएगा. अंतर मिलने पर खरीद-बिक्री और स्रोत की जांच निर्माता स्तर तक पहुंचेगी. क्रॉस बिलिंग, असामान्य कम कीमत पर बिक्री या केवल कागजों पर स्टॉक एडजस्टमेंट जैसी गतिविधियां संदिग्ध मानी जाएंगी. दूसरे राज्यों से आने वाली दवाओं के मामले में संबंधित राज्य के अधिकारियों के जरिए निर्माता और सप्लायर का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा. इसके साथ ही बिलिंग सॉफ्टवेयर की भी जांच होगी. माइनस स्टॉक, बैक डेटेड बिलिंग, डेटा डिलीट करना या दोहरे खाते रखने जैसी गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया जाएगा.

पैकिंग से सिक्योरिटी फीचर तक होगा चेक

एसओपी में कहा गया है कि संदिग्ध दवाओं के लेबल, स्पेलिंग, फॉर्मूला, बैच नंबर, निर्माण-एक्सपायरी तिथि, पैकिंग और सिक्योरिटी फीचर की तुलना मूल दवा से की जाएगी. अंतर मिलने पर बिक्री रोककर नमूना राजकीय विश्लेषक को भेजा जाएगा. वैध स्रोत न मिलने या निर्माता द्वारा निर्माण से इनकार करने पर दवा को काउंटरफीट/स्प्यूरियस मानकर कार्रवाई होगी. एसओपी में कहा गया है कि कोडीन सिरप, पेन किलर और एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. संगठित नेटवर्क या अपराध की पुष्टि होने पर बीएनएस और एनडीपीएस के तहत भी मुकदमा दर्ज होगा.