लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 अगस्त को राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं को भरोसा दिलाया था कि अगले 6 महीनों में एक लाख नौजवानों को अलग-अलग चरणों में हर हफ्ते सरकारी नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. इसे लेकर मायावती ने सरकार पर निशाना साधा है.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालांकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी कदम ज्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियां पेपरलीक और भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जाए तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलॉग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है.
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मायावती ने आगे कहा कि ‘यहां 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक जरूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है.’
मायावती ने आगे कहा कि ‘इसके साथ ही, बीएसपी यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की मांग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहां लगभग 30 हजार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की जरूरत है.’


