दिल्ली सरकार राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने बताया कि दिल्ली के 100 सरकारी स्कूलों में मेडिकल रूम (medical rooms) शुरू किए जाएंगे। इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। इन मेडिकल रूम के जरिए स्कूल में ही छात्रों को तत्काल प्राथमिक उपचार और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। किसी छात्र की तबीयत अचानक खराब होने या चोट लगने की स्थिति में उसे शुरुआती चिकित्सा सहायता मिल सकेगी। सरकार की ओर से मेडिकल रूम की शुरुआत फिलहाल 100 सरकारी स्कूलों से की जाएगी।

सफल रहा तो 1,086 स्कूलों तक पहुंचेगी सुविधा

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के मुताबिक, अगर 100 स्कूलों में शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसी तरह की सुविधा दिल्ली के 1,086 सरकारी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्कूल स्तर पर ही छात्रों को जरूरी स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि छोटी स्वास्थ्य समस्याओं या आपात स्थिति में तुरंत शुरुआती मदद मिल सके। इस परियोजना के लिए सरकार ने 5 करोड़ रुपये का बजट पहले ही मंजूर कर दिया है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहने और इसका दायरा बढ़ाने का फैसला होने पर अतिरिक्त सुविधाओं के लिए जरूरी धनराशि आने वाले वर्षों में जारी की जाएगी।

छात्रों को मिलेंगी कई स्वास्थ्य सुविधाएं

स्कूलों में बनाए जाने वाले मेडिकल रूम में छात्रों को जरूरत के समय प्राथमिक उपचार, बुनियादी मेडिकल मदद और कुछ देर आराम करने की सुविधा मिलेगी। बच्चों की उम्र और जरूरत के अनुसार मेडिकल सलाह के साथ काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। छात्राओं के लिए भी मेडिकल रूम उपयोगी होंगे। मासिक धर्म के दौरान परेशानी होने पर उन्हें स्कूल परिसर में ही सुरक्षित और निजी जगह मिल सकेगी, जहां वे जरूरत के अनुसार कुछ देर आराम कर सकेंगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों को स्कूल में ही तुरंत प्राथमिक चिकित्सा, बुनियादी स्वास्थ्य मदद और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग उपलब्ध कराना है।

छात्राओं को भी मिलेगी मदद

मेडिकल रूम में छात्राओं की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। मासिक धर्म के दौरान परेशानी होने पर छात्राओं को स्कूल में ही सुरक्षित और निजी स्थान उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे उन्हें असहज स्थिति में स्कूल से तुरंत घर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे जरूरत के अनुसार आराम कर सकेंगी।

आउटसोर्सिंग के जरिए होगी मेडिकल कर्मियों की नियुक्ति

मेडिकल रूम के संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के जरिए मेडिकल कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार के मुताबिक, ये कर्मचारी छात्रों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी देंगे और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। इसके अलावा मेडिकल कर्मियों की जिम्मेदारी काउंसलिंग और छात्रों से जुड़े जरूरी स्वास्थ्य रिकॉर्ड के रखरखाव की भी होगी। इससे स्कूल स्तर पर छात्रों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की निगरानी में मदद मिलेगी।

मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का ही होगा इस्तेमाल

सरकार के अनुसार, मेडिकल रूम के लिए स्कूलों में पहले से उपलब्ध मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य कम लागत में छात्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधा शुरू करना है। सरकार का कहना है कि इस पहल से स्कूलों में सुरक्षित, बेहतर और स्वास्थ्य के अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही छात्रों की पढ़ाई में कम से कम रुकावट डालते हुए उनके शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा सकेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन से जुड़ी पहल

सरकार के मुताबिक, स्कूलों में मेडिकल रूम शुरू करने की पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य शिक्षा के साथ छात्रों के समग्र विकास और उनके स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना है। सरकार का कहना है कि स्कूल में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध होने से छात्रों को समय पर मदद मिल सकेगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना कम होगी।

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